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ऑशवित्ज़ जनसंहार के साठ वर्ष पूरे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया भर के राजनीतिक नेताओं और दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ऑशवित्ज़ नात्सी यातना शिविर से बच निकलने वाले कुछ लोगों ने गुरुवार को इस शिविर से मुक्ति के 60 साल पूरे होने पर आयोजित एक समारोह में हिस्सा लिया. ये नात्सी शिविर पोलैंड में स्थित था और हिटलर के नेतृत्व वाली सेना ने वहाँ दस लाख से भी ज़्यादा यहूदियों को मौत के घाट उतार दिया था. साठ साल पहले 1945 में सोवियत संघ की फ़ौजों के वहाँ पहुँचने पर इस शिविर में क़ैद लोगों को आज़ाद करवाया गया था. इस शिविर में यहूदियों के जनसंहार की घटना को 'होलोकॉस्ट' भी कहा जाता है. इसराइल और जर्मनी के राष्ट्राध्यक्षों के साथ-साथ रूस और अन्य देशों के नेताओं ने भी मृतकों को पोलैंड में उसी स्थल पर स्मरण किया जहाँ ये जनसंहार हुआ था. इस शिविर से बच निकलने वाले छह लोग और तीन पूर्व सोवियत सैनिकों ने स्मारक पर मोमबत्तियाँ जलाईं. मृतकों की स्मृति में प्रार्थनाएँ हुईं और मोमबत्तियाँ जलाई गईं. इस स्मृति समारोह में अमरीकी उप राष्ट्रपति डिक चेनी, ब्रितानी विदेश मंत्री जैक स्ट्रॉ, फ़्रांसीसी राष्ट्रपति ज्याक शिराक़, इसराइली राष्ट्रपति मोशे कात्सव, रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन मौजूद थे. हाल ही में दूसरे विश्व युद्ध में यहूदियों के जनसंहार के बारे में संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने कहा था, "यूरोप में रहने वाले दो तिहाई यहूदियों को मार दिया गया जिनमें 15 लाख बच्चे भी थे. एक पूरी सभ्यता, जिसने यूरोप के सांस्कृतिक और बौद्धिक विकास में अपनी संख्या से बढ़कर योगदान किया, पूरी तरह नष्ट कर दी गई." |
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