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शनिवार, 21 जनवरी, 2006 को 00:39 GMT तक के समाचार
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कनाडा के चुनावी दंगल में देसी चुनौती

एशियाई उम्मीदवार ज़ोर-शोर से प्रचार कर रहे हैं
जयपाल सिंह, बाल गोसाल और जगतार सिंह इन दिनों कनाडा में बड़ी मेहनत कर रहे हैं, वे बर्फ़बारी के बीच लोगों के दरवाज़ों पर दस्तक दे रहे हैं.

उन्हें चाहिए लोगों के वोट, 23 जनवरी को कनाडा में हो रहे आम चुनाव में लगभग 50 एशियाई मूल के उम्मीदवार मैदान में हैं जिनमें ये तीनों भी शामिल हैं.

बाल गोसाल अपनी पत्नी और दो बेटियों के साथ ब्राम्प्टन में कंज़रवेटिव पार्टी के मुख्यालय में पहुँचते हैं.

उनकी पत्नी प्राणजीत एक कुर्सी पर बैठकर पति को मेल और ग्लोब अख़बारों की हेडलाइन सुनाती हैं जबकि बाल गोसाल साथ ही साथ अपने अभियान के प्रबंधक ज्योफ़ रिची से चर्चा भी जारी रखते हैं.

गोसाल बताते हैं कि उनका चुनाव प्रचार तीन भाषाओं में चल रहा है, हिंदी, पंजाबी और अँगरेज़ी.

वे कहते हैं, "एक ही दरवाज़े पर कई बार हमें तीनों भाषाएँ बोलनी पड़ती हैं लेकिन अगर ऐसा करने से वोट पक्का होता है तो क्या बुराई है."

ब्राम्प्टन

ब्राम्प्टन में भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका से आए लोगों की बहुत बड़ी आबादी है.

दक्षिण एशियाई मूल के लगभग पचास उम्मीदवार मैदान में हैं

यहाँ से ग्रीन पार्टी के उम्मीदवार जयपाल सिंह कहते हैं, "ज़रा सोचिए, आप भारत से यहाँ आकर अपने तरीक़े से पूजा-पाठ कर सकते हैं, अपनी पसंद का खाना खा सकते हैं, अपनी भाषा बोल सकते हैं फिर भी हैं कनाडाई."

एक इंश्योरेस कंपनी में काम करने वाले जगतार शेरगिल 13 वर्षों से कनाडा में रह रहे हैं और लोगों को बड़े फ़ख्र से बताते हैं कि उनके दोनों बेटे कनाडा का राष्ट्रीय खेल आइस हॉकी खेलते हैं.

वे कहते हैं, "यह एक महान देश है, यहाँ आप नौकरी कर सकते हैं, मकान ख़रीद सकते हैं और संसदीय चुनाव भी लड़ सकते हैं, यहाँ तक कि जीत भी सकते हैं."

जगतार का कहना बिल्कुल सही है, कनाडा में उज्जल दोसाँझ इस समय स्वास्थ्य मंत्री हैं और वे ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के प्रीमियर भी रह चुके हैं.

उनके अलावा, हर्ब धालीवाल, गुरबख्श मलही और नवदीप बैंस पिछली सरकारों में मंत्री रह चुके हैं.

कनाडा के एक चुनाव विश्लेषक माइकल एडम्स कहते हैं, "पिछले दो दशकों में इतने आप्रवासी कनाडा में आए हैं कि उन्होंने इस देश के चुनाव का चेहरा ही बदल दिया है."

वे कहते हैं, "देश की चालीस प्रतिशत से अधिक आबादी कहीं और पैदा हुई है, कनाडा में सिर्फ़ कुशल लोगों को आकर बसने की अनुमति दी गई है इसलिए यहाँ के लोग बहुत पढ़े-लिखे और समझदार हैं."

कनाडा के एशियाई उम्मीदवार इस चुनाव में जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं, अब चुनाव परिणाम बताएँगे कि उन्हें कितनी सफलता मिलती है.

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