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'अभी भी जारी है चीन में प्रताड़ना' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र के एक विशेष जाँचकर्ता ने कहा है कि चीन में अनेक जगह अब भी बंदियों को यातनाएँ दी जाती हैं चाहे शहरी इलाक़ों में ऐसी घटनाओं में कुछ कमी आई है. संयुक्त राष्ट्र के जाँचकर्ता मैनफ़्रैड नोवाक ने चीन में कई हिरासत केंद्रों पर जाने के बाद ऐसा कहा है. उन्होंने तिब्बत और मुसलिम बहुल शिनजियाँग क्षेत्र का दौरा किया. नोवाक ने आरोप लगाया कि कई जगह जब उन्होंने बंदियों से बात की तो बंदियों की बातों को रिकॉर्ड किया जा रहा था जबकि कई अन्य बंदियों को बलपूर्व उनसे मिलने से रोका गया. उनका कहना था कि ख़ास तौर पर श्रम केंद्रों में बंदियों को मनोवैज्ञानिक तरीक़ से यातनाएँ दी जाती हैं ताकि उनका व्यक्तित्व ही बदल दिया जाए. नोवाक ने आरोप लगाया कि बंदियों पर दोष स्वीकार करने और सबूत एकत्र करने के लिए भीषण दबाव डाला जाता है और जब तक स्वतंत्र न्यायपालिका नहीं होगी तब तक इसकों रोकना संभव नहीं होगा. महत्वपूर्ण है कि चीन ने औपचारिक तौर पर हिरासत में यातनाएँ देना 1996 में ग़ैर-क़ानूनी घोषित किया था. | इससे जुड़ी ख़बरें चीन में बर्ड फ्लू इंसानों में भी16 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना चीन राजनीतिक आज़ादी देः बुश16 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना परमाणु समझौते की आलोचना05 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना हू जिंताओ उत्तर कोरिया को मनाएंगे28 अक्तूबर, 2005 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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