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'परमाणु कार्यक्रम देश में ही' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ईरान की परमाणु ऊर्जा एजेंसी के अध्यक्ष ग़ुलामरज़ा आग़ाज़ादेह ने ज़ोर देकर कहा है कि अपने यहाँ यूरेनियम संवर्धन करने का उनके देश का फ़ैसला सही है. ग़ुलामरज़ा ने इन सुझावों पर कोई समझौता करने से इनकार किया है कि यूरेनियम संवर्धन का काम देश में नहीं बल्कि कहीं और किया जाए. रूस के विदेश मंत्री इगोर इवानोफ़ की तेहरान यात्रा के दौरान ग़ुलामरज़ा ने पत्रकारों से बातचीत में यह बात कही. तेहरान में बीबीसी संवाददाता फ्रांसिस हैरिसन का कहना है कि इस तरह की पेशकश की गई थी कि अगर ईरान यूरेनियम संवर्धन का अपना कार्यक्रम रूस में स्थानांतरित करने के लिए राज़ी हो जाए तो उसके कच्चे यूरेनियम पर बातचीत जारी रह सकती है. इस पेशकश को ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी का समर्थन हासिल है. ये देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर दो साल से बातचीत में हिस्सा लेते रहे हैं. यह बातचीत गत अगस्त में टूट गई थी. रूसी विदेश मंत्री ने कहा था कि वह इस पेशकश के लिए ईरान के नरम रवैये की उम्मीद करते हैं. लेकिन जब से उनके दूत और रूस के सुरक्षा प्रमुख इगोर इवानोफ़ की तेहरान में हुई बातचीत के बाद उन्होंने ईरान के लिए किसी और प्रस्ताव की संभावना से इनकार किया है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इससे यह संकेत मिलता है कि बातचीत सही रास्ते पर नहीं चल रही है. अब ईरान की परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ईरान अपना परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम अपनी ही धरती पर आगे बढ़ाना चाहता है. हालाँकि पहले भी ऐसी कम ही संभावना थी कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम किसी और देश में आगे बढ़ाने के लिए राज़ी हो जाएगा. इसकी वजह ये थी कि ईरानी नेता ज़ोर देकर कह चुके हैं कि उनका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और इसके लिए किसी और देश पर निर्भर नहीं रहा जा सकता है. | इससे जुड़ी ख़बरें बातचीत बहाली के लिए ईरान का न्यौता06 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना ईरान ने निरीक्षण की इजाज़त दी03 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना कई ईरानी राजदूत वापस बुलाए गए02 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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