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शेरॉन नेतृत्व की लड़ाई में जीते | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इसराइल में प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने सत्तारूढ़ लिकुद पार्टी के नेतृत्व की लड़ाई में कम अंतर से जीत हासिल की है. उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों ने लिकुद पार्टी के नेता का चुनाव अप्रैल 2006 के बजाय इस साल नवंबर में कराने के प्रस्ताव पर मतदान कराया था. लिकुद पार्टी की केंद्रीय समिति के इस मतदान में 51.4 प्रतिशत सदस्यों ने निर्धारित समय से पूर्व चुनाव कराने का विरोध किया, जबकि 47.7 प्रतिशत ने चुनाव नवंबर में कराने के प्रस्ताव का समर्थन किया. तेल अवीव से बीबीसी संवाददाता के अनुसार 3000 सदस्यीय लिकुद केंद्रीय समिति में बहुमत शेरॉन के पक्ष में होने का ये मतलब निकाला जा सकता है कि पार्टीजनों को आम इसराइलियों के बीच शेरॉन की लोकप्रियता पर भरोसा है. ज़्यादातर लिकुद पार्टी सदस्यों को शेरॉन से अगले साल आम चुनाव में पार्टी को जीत दिलाने की उम्मीद है. नेतन्याहू की चुनौती ताज़ा मतदान को ग़ज़ा पट्टी से इसराइली वापसी की शेरॉन की कार्रवाई पर जनमत संग्रह के रूप में देखा जा रहा था. शेरॉन को चुनौती देने वालों में सर्वप्रमुख हैं पूर्व प्रधानमंत्री और पूर्व लिकुद नेता बिन्यामिन नेतन्याहू. उल्लेखनीय है कि नेतन्याहू ने ग़ज़ा पट्टी से इसराइली वापसी का खुल कर विरोध किया था. उनका आरोप था कि ग़ज़ा पट्टी को चरमपंथियों के हाथों में छोड़ दिया गया है. सोमवार को मिली जीत के बाद माना जाता है कि शेरॉन अब पार्टी के भीतर अपनी लोकप्रियता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे. |
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