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जर्मनी में विपक्ष आगे, लेकिन सत्ता से दूर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जर्मनी के आम चुनाव में विपक्षी रूढ़िवादी गठबंधन सत्ताधारी पार्टी से केवल तीन सीट से आगे रहा है लेकिन वह अपने दम पर सरकार नहीं बना सकेगा. संसदीय चुनाव में एंगेला मैरकल का क्रिश्चियन डेमोक्रेट गठबंधन वर्तमान चांसलर गेरहर्ड श्रोएडर की पार्टी सोशल डेमोक्रेट (एसपीडी) से आगे रहा है. लेकिन दोनों प्रतिद्वंद्वियों को मिले मतों का अंतर एक प्रतिशत से भी कम है. ऐसी स्थिति में दोनों में से किसी भी पक्ष ने हार स्वीकार नहीं की है जिससे देश में राजनीतिक अनिश्चय की स्थिति बन गई है. बताया जा रहा है कि इस राजनीतिक अनिश्चय का हल निकलने में कई दिन से लेकर कई सप्ताह तक का समय लग सकता है. संवाददाताओं के अनुसार अब ज़्यादा संभावना एक साझा सरकार के गठन की है. स्थिति
चुनाव में एंगेला मैरकल की पार्टी (सीडीयू) और उनकी सहयोगी पार्टी क्रिश्चियन सोशल यूनियन(सीएसयू) के गठबंधन को 35.2 प्रतिशत मत मिले हैं. वहीं चांसलर श्रोएडर की पार्टी सोशल डेमोक्रेट (एसपीडी) को 34.3 प्रतिशत वोट मिले हैं. सीटों के हिसाब से सीडीयू/सीएसयू को 225 और एसपीडी को 22 सीटें मिली हैं. नतीजों पर टिप्पणी करते हुए एंगेला मैरकल ने कहा,"निश्चित रूप से हम और बेहतर परिणाम की आशा कर रहे थे". श्रोएडर ने कहा है कि उनकी पार्टी ऐसी किसी साझा सरकार का हिस्सा नहीं बनना चाहेगी जो कि मैरकल के नेतृत्व में बनती हो. उन्होंने कहा कि वे दोनों बड़ी पार्टियों के गठबंधन को तभी स्वीकार करेंगे जब उनको नेता बनाया जाए. श्रोएडर ने अपने समर्थकों से कहा,"नतीजे बताते हैं कि जर्मनी में गेरहार्ड श्रोएडर फिर चांसलर बनेंगे". काँटे का मुक़ाबला रविवार शाम मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद आए एग्जिट पोल के अनुसार एंगेला मैरकल की अगुआई वाली क्रिश्चियन डेमोक्रेट पार्टी(सीडीयू) गठजोड़ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है.
चुनाव में दोनों प्रमुख पार्टियों के बीच काँटे का मुक़ाबला था और दोनों ने ही इसे देश भविष्य की लड़ाई क़रार दिया था. अंतिम समय तक एक चौथाई मतदाता अपनी राय नहीं बना पाए थे. और इसे देखते हुए दोनों नेताओं ने मान्य परंपराओं की अनदेखी करते हुए मतदान से एक दिन पूर्व भी चुनाव प्रचार किया. दोनों नेताओं ने परस्पर व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप भी लगाए. गेरहार्ड श्रोएडर ने जर्मनी को जनकल्याणकारी राज्य बनाए रखने के लिए समर्थन माँगा, जबकि मैरकल ने व्यापक आर्थिक सुधारों की दुहाई देकर वोटरों को रिझाने की कोशिश की. |
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