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अमरीका ने लगाई विदेशी मदद की गुहार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
समुद्री तूफ़ान कैटरीना से मची तबाही के बाद अमरीका ने पहली बार विदेशी मदद की गुहार लगाई है. समुद्री तूफ़ान की वजह से लुइज़ियाना, अलाबामा और मिसीसिपी प्रांतों में भारी तबाही मची है, हज़ारों लोग मारे गए हैं और बहुत बड़ी तादाद में लोग बेघर हो गए हैं. यूरोपीय संघ और नैटो, दोनों ने इस बात की पुष्टि की है कि अमरीका ने उनसे आपातकालीन सहायता माँगी है. अमरीका ने अपनी अपील में कहा है कि हज़ारों लोगों को कंबल, खाने की चीज़ें, प्राथमिक उपचार की सामग्री और पीने के पानी की ज़रूरत है. दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि अमरीका ने सहायता के उसके प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है. यूरोपीय संघ के एक वरिष्ठ अधिकारी स्रावोस दिमास ने कहा है कि वे अमरीका की मदद करने को तैयार हैं. नैटो ने कहा है कि वे अपने एक वरिष्ठ अधिकारी को अमरीका रवाना कर रहे हैं जो स्थिति का जायज़ा लेकर अपनी रिपोर्ट देंगे. इसके अलावा कई यूरोपीय देशों ने पहले ही अमरीका को आर्थिक सहायता देने की पेशकश की है. बुरी हालत अमरीका के रक्षा मंत्री डॉनल्ड रम्सफ़ेल्ड ने तूफ़ान प्रभावित इलाक़ों का दौरा किया है और सेना की ओर से चलाए जा रहे राहत अभियान का मुआयना किया है. उन्होंने कहा, "अमरीका के इतिहास में पहले कभी ऐसी तबाही नहीं हुई है, इस पूरे इलाक़े को इससे उबरने में महीनों या वर्षों लग जाएँगे." अमरीकी सेना तूफ़ान प्रभावित इलाक़े में क़ानून-व्यवस्था क़ायम करने की कोशिश कर रही है जबकि अब भी हज़ारों लोग कई दिनों से भूखे-प्यासे पड़े हैं. अमरीका के दक्षिणी हिस्से में आए समुद्री तूफ़ान कैटरीना के बाद फँसे हज़ारों लोगों को हवाई जहाज़ों के ज़रिए सुरक्षित जगहों पर पुहँचाया गया है. माना जा रहा है कि अमरीका के इतिहास में ये सबसे बड़ा राहत कार्य है जिसमें इतनी बड़ी संख्या में विमान भी हिस्सा ले रहे हैं, सिर्फ़ नयू ऑर्लियंस से ही 10 हज़ार लोगों को निकाला जा चुका है. अल क़ायदा इस बीच इंटरनेट पर अल क़ायदा से जुड़ी एक वेबसाइट पर एक संदेश प्रकाशित किया गया है जिसमें कहा गया है कि अमरीका में आया तूफ़ान 'अल्लाह की सज़ा' है. अबू मुसाब अल ज़रकावी नाम के इराक़ी चरमपंथी से संबंधित बताई जा रही "वेबसाइट का कहना है कि ग़रीब लोगों की आह का असर है कि अल्लाह ने अमरीका पर हमला किया है." वेबसाइट का कहना है कि "अब तक अमरीका अपनी मर्ज़ी से किसी पर भी हमला करता रहा है लेकिन अब वह खाने और तेल के लिए भीख माँग रहा है." |
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