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मंगलवार, 16 अगस्त, 2005 को 17:12 GMT तक के समाचार
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बलपूर्वक ख़ाली कराई जाएँगी बस्तियाँ
ग़ज़ा से हटने का विरोध करते लोग
कई बस्तियों में अब भी बड़ी संख्या में लोग हैं
इसराइली सेना ने कहा है कि गज़ा पट्टी में रह गए यहूदियों को बलपूर्वक हटाने का काम बुधवार को शुरू किया जाएगा.

इसराइल ने गज़ा पट्टी से इसराइली यहूदियों को निकलने के लिए मंगलवार की अर्धरात्रि तक का समय दिया था और कहा था कि जो लोग इसके बाद रह जाएँगे उन्हें बलपूर्वक हटाया जाएगा.

यहूदियों को हटाने के अभियान की अगुआई कर रहे इसराइली अधिकारी जनरल डैन हारेल ने पत्रकारों को बताया है कि बुधवार दिन निकलते ही पुलिस और सेना के दल गज़ा पट्टी की उन बस्तियों में जाएँगे जिसे यहूदियों ने ख़ाली नहीं किया है.

समझा जाता है कि बस्तियाँ ख़ाली कराने के लिए लगभग 45,000 सुरक्षाकर्मियों की सहायता ली जाएगी.

वैसे इसराइली सरकार का कहना है कि गज़ा पट्टी में रहनेवाले लगभग 9000 यहूदियों में से लगभग आधे लोगों ने बस्तियाँ ख़ाली कर दी हैं.

इसराइली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने इसे दुखदायी लेकिन राष्ट्र के लिए ज़रूरी प्रक्रिया बताया है.

झड़प और गिरफ़्तारी

सबसे पहली यहूदी बस्ती जिसे ख़ाली करा लिया गया है उसका नाम है दुगित जहाँ लगभग 80 लोग रहते थे.

लेकिन बाक़ी की लगभग 20 बस्तियों में प्रधानमंत्री शेरॉन की इस योजना का बहुत विरोध हो रहा है, कई बस्तियों से सुरक्षा बलों और स्थानीय बाशिंदों के बीच टकराव होने के समाचार मिले हैं.

कुल मिलाकर लगभग 50 लोगों को गिरफ़्तार भी किया गया है, सबसे बड़ी बस्ती नेवे देकलीम से हिंसक झड़पों के समाचार मिले हैं.

नेवे देकलीम में अब भी बड़ी संख्या में लोग हैं जो वहाँ से निकलने को तैयार नहीं हैं और बड़ी संख्या में इसराइल के दूसरे हिस्सों से यहूदी आए हैं जो उनके साथ मिलकर इसका विरोध कर रहे हैं.

फ़लस्तीनी

जैसे-जैसे ग़ज़ा पट्टी से यहूदी बस्तियाँ हटने की समय सीमा पास आती जा रही है फ़लस्तीनी अरब लोग सड़कों पर उतरकर ख़ुशियाँ मना रहे हैं.

विरोध
सबसे ज़्यादा विरोध सबसे बड़ी बस्ती नेवे देकलीम में हो रहा है

मंगलवार को दिन में चरमपंथी संगठन हमास ने एक रैली का आयोजन किया जिसमें हज़ारों लोगों ने हिस्सा लिया.

हमास के समर्थकों ने ग़ज़ा और इसराइली इलाक़े बीच बनाई गई दीवार के ऊपर फ़लस्तीनी झंडे लगा दिए.

फ़लस्तीनी नेताओं ने इस मौक़े पर ग़ज़ा की सफ़ाई का अभियान शुरू कर दिया है जिसमें प्रधानमंत्री अहमद कुरई सहित कई बड़े नेताओं ने हिस्सा लिया.

इन लोगों ने दीवारों पर लिखे यहूदी नारों और पोस्टरों को मिटाने के अलावा सड़कों की सफ़ाई भी की.

प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने दो वर्ष पहले गज़ा पट्टी से यहूदी बस्तियों को हटाने की योजना बनाई थी, जिसे काफ़ी विरोध के बाद संसद और मंत्रिमंडल की मंज़ूरी मिली.

इस फ़ैसले के विरोध में उनकी सरकार के वित्त मंत्री और पूर्व प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतनयाहू ने इस्तीफ़ा दे दिया.

1967 की लड़ाई के दौरान इसराइली सेना ने मिस्र और जॉर्डन से गज़ा पट्टी और पश्चिमी तट का इलाक़ा छीन लिया था और वहाँ यहूदी बस्तियाँ बसाना शुरू किया था.

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