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'लंदन के आर्थिक संस्थान निशाने पर' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लंदन पुलिस आयुक्त जेम्स हार्ट ने कहा है कि लंदन के आर्थिक प्रतिष्ठानों पर हमला कभी भी हो सकता है. पुलिस आयुक्त जेम्स हार्ट ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया कि 11 सितंबर के बाद से संभावित ठिकानों की कई बार टोह लेने की कोशिश की गई है. लेकिन इस सिलसिले में अब तक किसी को भी गिरफ़्तार नहीं किया गया है. पुलिस आयुक्त ने कहा कि सिर्फ़ 50 फ़ीसदी संस्थानों के पास ही आपदा से निपटने की योजना है और कंपनियों के प्रमुखों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है. ऐसा अनुमान है कि अमरीका में 2001 के हमले के बाद जो कंपनियाँ अस्थायी तौर पर बंद हुईं थी उनमें से 50 फ़ीसदी फिर दोबारा कभी नहीं खुलीं. जेम्स हार्ट के मुताबिक़ पश्चिमी देशों के आर्थिक केंद्र संदिग्ध चरमपंथियों के निशाने पर हैं. उनका मानना है कि सरकार और आम लोगों को नुक़सान पहुँचाने का सबसे कारगर तरीक़ा है कि आर्थिक प्रतिष्ठानों को नुक़सान पहुँचाया जाए. लंदन पुलिस आयुक्त का कहना है कि लंदन पिछले 30 सालों से चरमपंथियों के निशाने पर रहा है जिसमें आईआरए के हमले भी शामिल हैं. सीबीआई ने कहा है कि लंदन में हुए हमले के बाद उम्मीद की जा रही है कि व्यापारिक केंद्र चरमपंथी हमले के ख़तरे को गंभीरता से लेंगे. |
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