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किर्गिस्तान में गंभीर संवैधानिक संकट | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मध्य एशियाई देश किर्गिस्तान में संवैधानिक संकट का निपटारा करने के लिए यूरोपीय विशेषज्ञ सामने आए हैं. यूरोपीय सुरक्षा संगठन ओएससीई के प्रमुख और क़ानूनी विशेषज्ञ भी वहाँ पहुँच गए हैं. किर्गिस्तान में लोकतंत्र समर्थक दलों के नेता ये तय नहीं कर पा रहे हैं वहाँ हाल ही में हुए विवादास्पद चुनाव के पहले गठित संसद वैधानिक है या चुनाव के बाद गठित संसद. किर्गिस्तान के कार्यवाहक राष्ट्रपति कुर्मानबेक बाकियेव का कहना है कि हाल ही में किर्गिस्तान में हुआ विद्रोह चुनाव को लेकर हुआ था – इसीलिए चुनाव के बाद बनी संसद को वैधानिक नहीं माना जा सकता. लेकिन इसी मुद्दे को लेकर बहस छिड़ गई है. इसके अलावा किर्गिस्तान में रह रहे रूसी नागरिकों को लेकर चिंता बरक़रार है. विवाद किर्गिस्तान की संसद में रविवार का दिन गर्मा-गर्म बहस और ज़ोर आज़माइश का दिन था. दरअसल, संसद में दो तरह के सांसद थे. एक तो वो, जो हाल के विवादास्पद चुनाव के बाद चुने गए हैं और दूसरे वो जो चुनाव से पहले सांसद थे. पुराने सांसद चिल्ला चिल्लाकर कह रहे थे कि विवादास्पद चुनावों में जीते लोग धाँधली कर चुने गए हैं इसीलिए उन्हें देश के भविष्य को लेकर हो रहे फ़ैसलों में कोई बात कहने का हक नहीं है. इन पुराने सांसदों के हक़ में है किर्गिस्तान का उच्चतम न्यायालय, जो पहले ही कह चुका है कि चुनाव में तत्कालीन सरकार ने कई जगहों पर बाधा डाली थी इसीलिए चुनाव से पहले चुनी गई संसद ही वैधानिक संसद है. बाकियेव की परेशानी वर्तमान राष्ट्रपति कुर्मानबेक बाकियेव पुरानी संसद के ही पक्षधर हैं. लेकिन उनकी परेशानी बढ़ी है उनके ही रक्षा प्रमुख फ़ीलिक्स कुलोव के बयान से.
रक्षा प्रमुख फ़ीलिक्स कुलोव का कहना है कि पुरानी संसद का कार्यकाल ख़त्म हो चुका है इसीलिए क़ानूनन नई संसद ही वैधानिक संसद है. कुलोव का कहना है कि अगर ये संवैधानिक संकट जारी रहा तो उसका फ़ायदा उठाकर विद्रोह के ज़रिए हटाए गए पूर्व राष्ट्रपति अस्कर अकायेव एक बार फिर सत्ता में लौटने की कोशिश कर सकते हैं. इस बीच, किर्गिस्तान के लोकपाल यानि ओम्बुड्समैन बाकिर ऊलु ने अपील जारी की है कि पूर्व राष्ट्रपति अकायेव अपना इस्तीफ़ा सौंप दें, “मैं आज ये कह सकता हूँ कि आदरणीय अस्कर अकायेविच, आपने किर्गिस्तान के लिए बहुत कुछ किया है. आज आप किर्गिस्तान के लिए उससे भी आगे बढ़कर अपना योगदान दे सकते हैं – अपनी इच्छा से राष्ट्रपति के पद से इस्तीफ़ा देकर.” आशंका किर्गिस्तान यूरोपीय सुरक्षा संगठन यानि ओएससीई का सदस्य है इसीलिए संगठन के प्रमुख यान कूबिस इस संवैधानिक संकट का हल करने में मदद करने के लिए किर्गिस्तान पहुँच गए हैं. इस बीच, रूस में इस तरह की आशंकाएँ व्यक्त की जा रही हैं कि वर्तमान माहौल में उसके नागरिक किर्गिस्तान में कितने सुरक्षित हैं. ऐसी आशंकाओं को निराधार बताते हुए किर्गिस्तान के नए सुरक्षा प्रमुख फ़ीलिक्स कुलोव का कहना है, “मैं इस बात की बड़ी हद तक गारंटी दे सकता हूँ कि ऐसी बातों में कोई दम नहीं है. यूँ तो ऐसे माहौल में हर बात पर नियंत्रण रखना संभव नहीं है लेकिन फिर भी हम अपनी तरह से पूरी कोशिश कर रहे हैं.” इस माहौल के बीच किर्गिस्तान के वरिष्ठ अधिकारी कह रहे हैं कि जल्द से जल्द संवैधानिक संकट का निपटारा कर देश को सामान्य स्थिति में लाने की कोशिश करनी चाहिए ताकि देश किर्गिस्तान को गृहयुद्ध की ओर बढ़ने से रोका जा सके. |
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