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किर्गिस्तान में विद्रोह के बाद नई सरकार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मध्य एशियाई देश किरगिस्तान में विपक्षी नेताओं ने आगामी जून में नए चुनाव होने तक देश का शासन चलाने लिए एक परिषद का गठन किया है. इससे पहले दिन में राजधानी बिश्केक पर विपक्षी नेताओं का नियंत्रण हो गया था. विपक्षी नेता कुरमानबेक बाकीयेफ़ को देश के कार्यकारी मुखिया और प्रधानमंत्री बनाया गया है जिन्होंने अपने सहयोगी मंत्रियों के नामों की घोषणा कर दी है. विपक्षी नेता इचेनबई कादिरबेकौफ़ को संसद का अध्यक्ष बनाया गया है और संविधान के तहत वही देश के अंतरिम राष्ट्रपति होंगे. जेल में बंद विपक्षी नेता फेलिक्स कुलोव को जेल से निकाल कर सुरक्षा बलों का प्रमुख बनाया गया है. लेकिन पिछले चौबीस घंटे में जिस तरह सत्ता परिवर्तन हुआ उससे सभी अचंभित हैं. विवादास्पद चुनावों के बाद हफ्ते भर से चले आ रहे सरकार विरोधी प्रदर्शन गुरुवार को अपने चरम पर पहुंचे और नतीज़तन सत्ता परिवर्तन हुआ. पिछले कई सप्ताह से वहाँ चुनावों नतीज़ों के विरोध में प्रदर्शन हो रहे थे. शुक्रवार से पहले राजधानी बिश्केक में लूटपाट की घटनाएँ हुई थीं लेकिन दिन में शांति रही और परिवहन भी सामान्य रूप से चला. लेकिन शाम ढलते ही कुछ किशोर प्रदर्शनकारियों की भीड़ इकट्ठा हो गई जिसे पुलिस ने हवाई फ़ायर करके तितर-बितर कर दिया. रात का कर्फ़्यू लगा दिया गया है. हटाए गए राष्ट्रपति अशकर अकायेव ने अब पुष्टि कर दी है कि वह विदेश में हैं लेकिन कहाँ हैं, यह नहीं बताया. अकायेव सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान ग़ायब हो गए थे. ऐसी अफ़वाहें पहले से ही थीं कि वो देश छोड़कर भाग गए हैं. किरगिस्तान की समाचार एजेंसी को भेजे एक बयान में अकायेव ने विपक्षी गतिविधियों को बग़ावत क़रार दिया है. बयान में उन्होंने कहा है कि देश से बाहर उनकी मौजूदगी सिर्फ़ अस्थाई है. परिवर्तन पर नज़र किरगिस्तान के इस रक्तहीन विद्रोह और तख्तापलट पर रुस की भी नज़र है और अमरीका की भी क्योंकि दोनों ही देशों के सैनिक अड्डे किरगिस्तान में हैं.
रुस ने कहा है कि देश के सभी दल बातचीत शुरु करें और शांति बनाएं. अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस का कहना है कि अमरीका चाहेगा कि किरगिस्तान लोकतंत्र की राह पर जाए और स्थायी सरकार का गठन किया जाए. किरगिस्तान से चीन की भी सीमा लगती है और चीन ने भी शांति की अपील की है. अमरीका में किरगिस्तान के राजदूत बैक्तिबेक अब्द्रीसेब कहते हैं, ''यह एक संवैधानिक तख्तापलट है जैसा कि लातिन अमरीकी देशों में अक्सर होता रहा है. यह सुनियोजित तख्तापलट है. इसे हम आम जनता का विद्रोह नहीं कह सकते.'' उनका कहना है कि भीड़ ने इमारतों पर कब्ज़ा किया और जेलों से अपराधियों को भगा दिया. ये लोकतांत्रिक कैसे हो सकता है. इससे प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ ने जेल पर धावा बोलकर विपक्षी नेता फेलिक्स कुलोव को छुड़ा लिया था. किरगिस्तान के विपक्षी नेता कह रहे हैं कि ये जनविद्रोह है. ये आम जनता है जो राष्ट्रपति अकायेव से पीड़ित थी और उसने विद्रोह किया. मध्य एशिया के ही एक अन्य देश यूक्रेन में पिछले दिनों विवादास्पद चुनावों के बाद ऐसे ही प्रदर्शन हुए थे और सरकार बदल गई थी. |
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