|
संयुक्त राष्ट्र के आलोचक ही वहाँ राजदूत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने एक विवादास्पद अधिकारी जॉन बोल्टन को संयुक्त राष्ट्र में अमरीका का राजदूत नियुक्त किया है. जॉन बोल्टन अभी अमरीका में हथियारों के नियंत्रण पर सबसे बड़े विशेषज्ञ समझे जाते हैं और संयुक्त राष्ट्र के कट्टर आलोचक रहे हैं. बोल्टन की नियुक्ति को पहले अमरीकी संसद के सदन सेनेट की स्वीकृति लेनी होगी जिसके बाद वे जॉन डैनफ़ोर्थ की जगह ले सकते हैं जो जनवरी में सेवानिवृत्त हो गए थे. जॉन बोल्टन के नाम की घोषणा अमरीकी विदेश मंत्री कॉन्डोलीज़ा राइस ने की. उन्होंने कहा,"राष्ट्रपति बुश ने हमेशा ही संयुक्त राष्ट्र में अनुभवी और क्षमतावान लोगों को भेजा है.आज मैं इस बात की घोषणा करते हुए सम्मान अनुभव कर रही हूँ कि इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रपति बुश जॉन बोल्टन को संयुक्त राष्ट्र में अगला राजदूत नियुक्त करना चाह रहे हैं." अमरीकी विदेश मंत्री ने कहा कि जॉन बोल्टन के पिछले कामों का लेखा-जोखा संयुक्त राष्ट्र के सुधार के प्रति उनकी निष्ठा का सबूत है. संयुक्त राष्ट्र के आलोचक बोल्टन की छवि एक कट्टरपंथी की है जो संयुक्त राष्ट्र की आलोचना करने के अतिरिक्त ये भी कहते रहे हैं कि संयुक्त राष्ट्र इराक़, ईरान और उत्तर कोरिया के विरूद्ध सख़्त कार्रवाई नहीं कर रहा. अमरीका में रिपब्लिकन तथा नव-कट्टरपंथी राजनेताओं में उनकी साख अच्छी है मगर उन्हें पिछले विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल का करीबी नहीं समझा जाता था. बताया जाता रहा है कि उन्होंने यहाँ तक कहा है कि संयुक्त राष्ट्र जैसी कोई चीज़ है ही नहीं. कथित तौर पर उन्होंने 1994 में ऐसा भी कहा था अगर न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय से 10 मंज़िलें कम कर दी जाएँ तो भी कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा. अभी हाल ही में उन्हें उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रमों के बारे में बहुपक्षीय बातचीत में शामिल किया गया था. मगर उन्होंने जिस तरह खुलेआम उत्तर कोरिया की आलोचना की उसके बाद उत्तर कोरिया ने उनके साथ बातचीत करने से ही इनकार कर दिया. लेकिन अमरीकी प्रशासन का कहना है कि जॉन बोल्टन संयुक्त राष्ट्र में अच्छी तरह से कार्य कर सकेंगे. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||