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विकास का खामियाज़ा भुगतते खनिक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चीन की तेज़ी से मज़बूत होती अर्थव्यवस्था की नींव कोयले पर खड़ी है जिससे पूरे देश की बिजली का दो तिहाई हिस्सा पैदा होता है. लेकिन इस कोयले के खनन में पिछले साल के पहले नौ महीने में औसतन प्रतिदिन 15 खनिकों की मौत हुई है. ये तथ्य सरकारी आकड़ों से उजागर हुआ है. चीन के नेताओं के समक्ष अब एक नई चुनौती है. किस तरह कोयले का उत्पादन बढ़ाया जाए और खनिकों की सुरक्षा भी. पिछले साल देश के 24 प्रांतों में लगातार बिजली का संकट बना रहा है. पिछले साल नवंबर महीने में एक बड़ा खान हादसा हुआ जिसमें 166 खनिकों की मौत हो गई. स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए और अख़बारों में लेख छपे कि आर्थिक प्रगति का कुछ मानवीय चेहरा खोजा जाए. ख़तरनाक खानें
चीन में मूलत: दो किस्म की खानें हैं. बड़ी बड़ी सरकारी खदानें जिन्हें आम तौर पर सुरक्षित माना जाता है जबकि छोटी निज़ी खदानें जहां अधिकतर घटनाएं होती हैं. निजी ख़दानों पर फ़िल्म बना चुके चीनी निर्देशक ली यांग कहते हैं " तकनीकी रुप से ये अवैध हैं लेकिन इन्हें सर्टिफिकेट मिला हुआ है. वो पैसा देते हैं और लाइसेंस लेते हैं. " ली यांग ने अपनी फ़िल्म के दौरान आधा दर्ज़न से अधिक खदानों का दौरा किया और 50 घंटे इन खदानों में बिताए. यांग के साथ एक खान दुर्घटना भी हुई लेकिन वो इसमें बच गए. यांग बताते हैं कि खान में होने वाली दर्घटनाओं को कोई गंभीरता से नहीं लेता और घटना के तुरंत बाद काम शुरु कर दिया जाता है. खनिकों को कोई प्रशिक्षण नहीं दिया जाता और न ही इनके पास विशेष जूते या कानों में पहनने के लिए कुछ दिया जाता है.
ये खनिक औसतन एक दिन में दस घंटे काम करते हैं और इन्हें महीने के 120 डॉलर दिए जाएंगे. पैसे इसी आधार पर मिलते हैं कि उन्होंने कितना कोयला निकाला. स्थानीय भ्रष्टाचार चीन में कोयले की बढ़ती हुई मांग के कारण कोयला खनन के काम में काफी लाभ होता है. स्थानीय सरकारें लाइसेंस पैसे लेकर बेचती हैं और खदानों को चलाने में उनकी कोई रुचि नहीं है. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के विशेषज्ञ जेफरी लोगान कहते हैं " स्थानीय सरकारें किसी की सुरक्षा को लेकर कोई परवाह नहीं करतीं. वो बस चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा कोयला निकाला जाए. " 1990 में अवैध खानों को बंद करने के लिए अभियान छेड़ा गया था लेकिन इसका बहुत अधिक प्रभाव नहीं पड़ा है. कार्य संबंधी सुरक्षा के लिए ज़िम्मेदार सरकारी तंत्र बार बार सुरक्षा के लिए चेतावनियां देती रही हैं और पिछले साल इसने अवैध खनन मालिकों पर 21 मिलियन युआन का ज़ुर्माना भी लगाया था. बढ़ती हुई मांग चीन में कोयले का उत्पादन पिछले दो सालों में 15 प्रतिशत बढ़ गया है. कहा जा रहा है कि बढ़ती हुई मांग का सीधा संबंध बढ़ती हुई दुर्घटनाओं से हैं. पिछले सालों में कोयले की क़ीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है लेकिन पावर जेनरेटर इसके लिए काफी कम पैसा देते हैं. यही कारण है कि सरकारी ख़दानों में निवेश नहीं हो रहा है. चीन धीरे धीरे कोयले की जगह ऊर्जा के अन्य स्त्रोतों की ओर पूरी तरह मुड़ा नहीं है लेकिन पनबिजली एवं परमाणु ऊर्जा पर काम चल रहा है. चीन इस समय दुनिया का सबसे बड़ा कोयला उत्पादक देश है और कोयले के भंडार के मामलों में उसका स्थान तीसरा है. पिछले साल चीन ने 1.8 अरब टन कोयला पैदा किया था. आईईए का मानना है कि 2030 तक भी चीन की ऊर्जा का 53 फीसदी हिस्सा कोयले से ही आएगा. |
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