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इराक़ी सैनिकों को मिल रही है धमकियाँ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ी सुरक्षा बलों को प्रशिक्षित करने वाले अमरीकी जनरल का कहना है कि सुरक्षा बलों को खतरनाक धमकियाँ मिल रही हैं और इसी कारण वो ठीक से काम नहीं कर पा रहे हैं. जनरल डेविड पेट्राइस ने माना कि इराक़ी सुरक्षा बलों की 88 बटालियनों में कुछेक में ही पूरी संख्या में सैनिक हैं. ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि प्रतिदिन सैनिकों की मौत हो रही है या फिर लोग सुरक्षा बलों को छोड़कर जा रहे हैं. पेट्राइस ने हाल में हुई उस घटना का जिक्र भी किया जिसमें चरमपंथियों ने घर वापस लौट रहे दस इराक़ी सैनिकों को गोली मार दी. हालांकि पेट्राइस यह नहीं बता सके कि कितने इराक़ी सैनिक धमकी के कारण सेना छोड़ कर जा रहे हैं. जनरल ने कहा कि इराक़ की सुरक्षा इराक़ी सैनिकों के हाथ में देने के कार्य में काफ़ी प्रगति हुई है.
उन्होंने बताया कि इराक़ी सेना और पुलिस के एक लाख 30 हज़ार से अधिक सुरक्षाकर्मियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है. इन सभी को विशेष प्रशिक्षण और हथियार दिए गए हैं. हालांकि पेंटागन में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि जानकार पेट्राइस की तरफ़ से दी गई संख्या पर सवाल उठा रहे हैं. सेना की वापसी इस बीच अमरीका ने कहा है कि अगले महीने इराक़ से 15000 अमरीकी सैनिकों को वापस बुलाया जाएगा. रक्षा उप मंत्री पॉल वोल्फोवित्ज़ ने सीनेट समिति को बताया कि ये वो सैनिक होंगे जिनकी कार्य अवधि इराक़ में चुनावों के कारण बढ़ा दी गई थी. वोल्फोवित्ज़ का कहना था कि इराक़ मे रास्ता बहुत ही कठिन है और अमरीका इस साल वहां एक लाख पैंतीस हज़ार सैनिक तैनात रखेगा. संवाददाताओं के अनुसार संभवत: रविवार को हुए भारी मतदान के कारण सैनिकों को वापस बुलाने का फैसला किया गया है. |
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