| पोप ने दिया क्रिसमस का संदेश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कैथोलिक ईसाइयों के धर्मगुरु पोप जॉन पॉल द्वितीय ने रोम के सेंट पीटर्स चौक पर क्रिसमस का सालाना संदेश दिया है जिसमें उन्होंने इराक़ की स्थिति पर चिंता प्रकट की है. 84 वर्षीय पोप ने इस अवसर पर अपने संदेश में इराक़ और मध्य पूर्व में जारी संघर्ष पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि दुनिया भर में किसी भी स्थान पर जारी संघर्ष मानवता को क्षति पहुंचा रहा है. उन्होंने सूडान की स्थिति पर भी अपनी बात कही. हज़ारों की संख्या में जुटे लोगों को संबोधित करते हुए पोप ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि पवित्र भूमि ( बैथलेहम जहां ईशा मसीह का जन्म हुआ था जो अब इस्राइल में है ) में शांति ज़रुर आएगी. पोप ने अपने उरबी एट ओरबी संदेश में कहा " मैं अफ्रीका में दारफुर के बारे में सोचता हूं, आइवरी कोस्ट और ग्रेट लेक्स के बारे में सोचता हूं. जब इराक़ का ख्याल आता है तो मुझे बहुत दुख होता है. " उन्होंने कहा " और कैसे भूल सकता हूं कि पवित्र भूमि को. मुझे पूरा विश्वास है कि एक दिन वहां भी शांति आएगी. " इससे पहले पोप ने आधी रात में प्रार्थना सभा की और मध्य पूर्व में शांतिपूर्ण सहअस्तित्व की अपील की. पोप का प्रयास पोप को भाषण के बीच में बार बार रुकना पड़ा अपने पारकिन्सन डिजीज के कारण. एक दो बार तो उनके सहयोगियों ने बयान पढ़ने में उनकी मदद की. बीबीसी संवाददाता डेविड विले का कहना है कि पोप बड़ी हिम्मत से काम ले रहे थे और ऐसा लग रहा था कि वो यह साबित करना चाहते हैं कि अभी भी चर्च के प्रमुख के तौर पर वो सक्रिय हैं. उधर वेस्ट बैंक के बैथलेहम में फलस्तीनी नेताओं ने पादरियों के साथ प्रार्थना में शिरकत की. इस बार इस्राइल ने फलस्तीनी नेताओं को यहां आने की अनुमति दी है. फलस्तीन राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार महमूद अब्बास समेत कई बड़े नेता इस अवसर पर मौज़ूद थे. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||