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आतंकवाद निरोधक क़ानून पर फटकार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन की सर्वोच्च अपीलीय अदालत ने एक महत्वपूर्ण फ़ैसले में कहा है कि बिना मुक़दमे के किसी विदेशी संदिग्ध चरमपंथी को हिरासत में रखना मानवाधिकार क़ानूनों का उल्लंघन है. ब्रितानी संसद के सदन हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स की न्यायिक पीठ ने नौ क़ैदियों की अपील पर बहुमत से यह फ़ैसला किया. इसे ब्रितानी सरकार के आतंकवाद निरोधक क़दमों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. न्यायिक पीठ के न्यायाधीशों ने कहा कि सरकार द्वारा उठाए गए क़दम यूरोपीय मानवाधिकार क़ानूनों से मेल नहीं खाते. सॉलिसिटर गैरेथ पियर्स ने सरकार से इन क़ैदियों को तुरंत रिहा करने को कहा. इनमें से ज़्यादातर लोग दक्षिणी लंदन के बेलमार्श जेल में अनिश्चितकाल से क़ैद हैं. इस फ़ैसले से सबसे ज़्यादा मुश्किल आई है गृह मंत्री चार्ल्स क्लार्क के लिए जिन्होंने गुरुवार को ही डेविड ब्लंकेट के त्यागपत्र के बाद पद भार संभाला है. तुलना मानवाधिकार संगठनों ने तो बेलमार्श जेल को ब्रिटेन का 'ग्वांतानामो बे' तक कहा है. ये संगठन आपातकालीन आतंकवाद निरोधक क़ानूनों के ख़िलाफ़ हैं. अपीलीय अदालत ने गृह मंत्रालय के अधिकारों का समर्थन करते हुए कहा था कि संदिग्ध चरमपंथियों को अनिश्चितकाल तक हिरासत में रखा जा सकता है. जिसके बाद इन क़ैदियों ने हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स का दरवाज़ा खटखटाया था. ब्रितानी सरकार मानवाधिकार पर यूरोपीय सम्मेलन के कुछ हिस्सों से अपने को अलग कर लिया था. सरकार को इस बात की चिंता थी कि 11 सितंबर के हमलों के बाद की स्थिति में आतंकवाद विरोधी क़ानून को लाने में समस्या न हो. किसी भी संदिग्ध विदेशी चरमपंथी को हिरासत में लिया जा सकता है या वे अपने देश की सरकार को सौंपे जाने के लिए भी तैयार हो सकते हैं. लेकिन पकड़े गए संदिग्ध चरमपंथियों से देश को ख़तरा है तो उनका प्रत्यर्पण भी नहीं किया जा सकता. लॉर्ड बिंघम ने कहा कि ब्रिटेन का क़ानून यूरोपीय मानवाधिकार सम्मेलन के परस्पर विरोधी है. अभिशाप लॉर्ड निकोलस ने कहा कि बिना किसी आरोप या मुक़दमे के किसी को अनिश्चितकाल के लिए रखना किभी भी देश के लिए अभिशाप है जहाँ क़ानून का शासन है.
उन्होंने कहा कि सरकार का पक्ष इसलिए भी कमज़ोर है कि वह विदेशी संदिग्ध व्यक्तियों को बिना मुक़दमे के हिरासत में रखने की पैरवी कर रही है लेकिन ब्रितानी लोगों के लिए वह ऐसा नहीं कर रही. लेकिन न्यायपीठ में शामिल लॉर्ड वॉकर ने अपील का विरोध किया और कहा कि आतंकवाद निरोधक क़ानून में उत्पीड़न के ख़िलाफ़ बचाव के कई महत्वपूर्ण तरीक़े हैं. दूसरी ओक इस फ़ैसले के बाद वुडहिल जेल में बंद एक क़ैदी ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि अब सरकार इस फ़ैसले के मुताबिक़ ही काम करेगी. इस क़ानून को ख़त्म करेगी और मुझे रिहा कर दिया जाएगा." इस मामले की संवैधानिक महत्ता को देखते हुए ही न्यायपीठ में नौ लॉर्ड्स शामिल किए गए थे जबकि आम तौर में इसमें सिर्फ़ पाँच लॉर्ड्स ही रहते हैं. |
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