BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
बुधवार, 01 दिसंबर, 2004 को 07:50 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
अमरीका में पहला मुस्लिम टीवी चैनल

News image
पाकिस्तानी मूल के बैंककर्मी मुज़म्मिल हसन लेकर आए हैं ये टीवी चैनल
अमरीका में 11 सितंबर के हमलों का सबसे ज़्यादा असर पड़ा है वहाँ के मुसलमानों पर. हमलों के बाद वहाँ के मुसलमानों की नीयत पर सवाल उठने लगे और उन्हें कई बार काफ़ी मुश्किलों का भी सामना करना पड़ा.

अमरीकी जनता में मुस्लिम समुदाय के प्रति बदली धारणा ने हालात को और बिगाड़ा है. अब
अमरीका में रहने वाले मुसलमानों ने समाज में उनके बारे में फैली ग़लतफहमियों को दूर करने के लिए एक और क़दम उठाया है.

अमरीका में पहली बार अब एक मुस्लिम टीवी चैनल शुरू हुआ है. इस चैनल के ज़रिए उम्मीद की जा रही है कि मुसलमानों को अपनी छवि सुधारने में मदद मिलेगी.

मंगलवार से पूरे अमरीका में ब्रिजेस टीवी नाम का यह चैनल प्रसारण शुरू कर रहा है और इसको देखने वालों में 80 लाख मुसलमानों के अलावा आम अमरीकी भी शामिल होंगे, क्योंकि यह चैनल कई केबल नेटवर्क पर उपलब्ध होगा.

श्रेय

इस चैनल को शुरू करने का श्रेय एक पाकिस्तानी मूल के बैंककर्मी मुज़म्मिल हसन को जाता है. कुछ अमरीकी संचार माध्यमों पर हसन ने मुस्लिम विरोधी प्रचार सुनकर यह फ़ैसला किया कि अब वह मुसलमानों के विचार रखने के लिए खुद एक चैनल शुरू करेंगे.

 रोज़ हम टी वी पर खबरें देखते हैं जिसमे मुसलमानों को आतंकवादी, हमलावर और बाग़ी जैसे शब्दों से नवाज़ा जाता है. लेकिन मुसलमानों की सहिष्णुता, सहनशीलता और तरक्की की कोई बात नहीं करता. ब्रिजेस टीवी पर हम लोग ऐसी ही बातों को उजागर करेंगे और मेल-जोल और शांति का पैग़ाम सारे लोगों तक पहुंचाएंगे
मुज़म्मिल हसन

फिर उन्होंने बैंक की नौकरी त्यागी और लग गए टीवी चैनल खोलने के काम में.

वह कहते हैं, “ रोज़ हम टीवी पर खबरें देखते हैं जिसमे मुसलमानों को आतंकवादी, हमलावर और बाग़ी जैसे शब्दों से नवाज़ा जाता है. लेकिन मुसलमानों की सहिष्णुता, सहनशीलता और प्रगति की कोई बात नहीं करता. ब्रिजेस टीवी पर हम लोग ऐसी ही बातों को उजागर करेंगे और मेल-जोल और शांति का पैग़ाम सारे लोगों तक पहुंचाएंगे.”

इस चैनल पर अंग्रेज़ी भाषा में ही सारे कार्यक्रम होंगे और इनमें खबरों के साथ साथ आम लोगों के जीवन और मुसलिम संस्कृति से जुड़े हर पहलू पर आधारित अलग अलग तरह के कार्यक्रम दिखाए जाएंगे.

इस्लाम के बारे में भी कार्यक्रम दिखाए जाएंगे. बच्चों के लिए भी कार्टूनों जैसे खास कार्यक्रम होंगे. अमरीका में मुसलमानों की ज़िंदगी के बारे में भी इस चैनल पर रोज़ाना कार्यक्रम दिखाए जाएंगे.

निवेशक

इस चैनल को चलाने के लिए कुछ निवेशकों ने धन लगाने की हामी भर रखी है. इसके अलावा क़रीब 60 हज़ार लोगों के इसके सदस्य भी बनने की उम्मीद है.

News image
टीवी पर कई तरह के कार्यक्रम दिखाए जाएँगे

विज्ञापन द्वारा भी पैसा इकट्ठा किया जाएगा. लेकिन इस चैनल की नीति है कि अमरीका से बाहर रहने वाले लोग इसमें पैसा नहीं लगा सकते.

इसका नाम भी ब्रिजेस या पुल इसलिए रखा गया है कि मुसलमानों और दूसरे अमरीकीयों के बीच जो फ़ासला आ गया है उसे दूर करने के लिए यह एक पुल का काम करेगा.

अमरीका में रहने वाले मुसलमालों के बीच इस चैनल को लेकर ख़ासा उत्साह है. कई नामी गिरामी हस्तियों ने भी इस चैनल को समर्थन दिया है.

जिनमें मशहूर मुक्केबाज़ मोहम्मद अली भी शामिल हैं. मोहम्मद अली कहते हैं, “ब्रिजेस टीवी अमरीकी मुसलमानों को उनकी अपनी आवाज़ प्रदान करेगा, जिसे अमरीका में रहने वाले दूसरे धर्मों के लोग भी सुनेंगे और मुसलमानों को बेहतर तौर पर समझ पाएंगे.”

इस चैनल के अधिकारियों का कहना है कि ग़ैर मुस्लिम लोगों ने भी इसके बारे में उत्साह दिखाया है और उन्हे उम्मीद है कि इससे आपस में मेल-जोल बढ़ाने में मदद मिलेगी और मुसलमनों के बारे में जो ग़लत धारणा है उसे भी दूर किया जा सकेगा.

इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>