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इराक़ में प्रस्तावित चुनावों के प्रति समर्थन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया के शीर्ष नेताओं ने इराक़ में 30 जनवरी को होने वाले चुनावों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है. दूसरी ओर इराक़ के अंतरिम विदेश मंत्री होशयार ज़ेबारी ने कहा है कि जो भी स्थिति हो देश में चुनाव समय पर ही होंगे. मिस्र के पर्यटक स्थल शर्म-अल-शेख़ में आयोजित एक सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने कहा कि इराक़ में हिंसा ख़त्म करने के लिए चुनाव महत्वपूर्ण है. इराक़ के भविष्य पर मिस्र में हुए सम्मेलन में अरब लीग, इस्लामिक सम्मेलन संगठन (आईओसी) और ग्रुप-आठ के सदस्य देशों के साथ-साथ चीन ने भी हिस्सा लिया. बैठक के बाद ज़ेबारी ने कहा, "देश में कैसी भी स्थिति हो जनवरी में होने वाला चुनाव रद्द नहीं किया जाएगा." संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने दुनियाभर के देशों से अपील की वे इराक़ में चुनावी प्रक्रिया का समर्थन करें ताकि इराक़ को एक एकीकृत और शांतिपूर्ण देश बनाया जा सके. समयसीमा नहीं फ़्रांस और कुछ अरब देशों की इच्छा के बावजूद बैठक में स्वीकृत संयुक्त घोषणापत्र में इराक़ से गठबंधन सैनिकों की वापसी की कोई समयसीमा नहीं तय की गई है. लेकिन घोषणापत्र में इस बात का उल्लेख ज़रूर किया गया है कि इराक़ी सुरक्षा बल देश का नियंत्रण संभाल ले, इसके लिए दुनिया के देशओं को सहायता करनी चाहिए. शर्म-अल-शेख़ से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि मिस्र के विदेश मंत्री अहमद अबुल सहति कुछ अरब प्रतिनिधियों ने यह स्पष्ट किया कि वे अगले साल के आख़िर तक इराक़ से गठबंधन सैनिकों की वापसी चाहते हैं. संयुक्त घोषणापत्र में इराक़ में होने वाली सभी तरह की चरमपंथी हिंसा की निंदा की गई है इनमें अपहरण और हत्या शामिल हैं. घोषणापत्र में ये भी कहा गया है कि इराक़ की अंतरिम सरकार चरमपंथियों से कड़ाई से निपटे. यह भी कहा गया है कि सैनिक कार्रवाई के मामले में संयम बरता जाए और आम नागरिकों का ख़्याल भी रखा जाए. घोषणापत्र में कहा गया है कि इराक़ में चुनाव की तैयारियों के साथ-साथ नए संविधान पर सर्वसम्मति के लिए संयुक्त राष्ट्र प्रमुख भूमिका निभाए. |
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