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रूस ने क्योटो समझौते पर हस्ताक्षर किए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने जलवायु परिवर्तन के लिए ज़िम्मेदार गैसों के उत्सर्जन में कटौती से संबंधित क्योटो संधि पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. उनके हस्ताक्षर के बाद अब यह संधि अगले वर्ष से लागू हो सकेगी, रूस के इस संधि पर हस्ताक्षर कर देने से इसके लागू होने का रास्ता खुल गया है. संधि की शर्तों के अनुसार अगर धरती का तापमान बढ़ाने वाली गैसों के कुल उत्सर्जन के 55 प्रतिशत हिस्से के लिए ज़िम्मेदार देश इस संधि पर हस्ताक्षर करें तभी यह लागू हो सकता है. अमरीका के इस संधि से अलग हो जाने के बाद इसका भविष्य ही ख़तरे में पड़ गया था लेकिन रूस ने एक तरह से इसे संकट से उबार लिया है. रूस के हस्ताक्षर करने के बाद अमरीका पर पर्यावरणवादियों का दबाव बढ़ जाएगा कि वह संधि को दोबारा स्वीकार कर ले. मॉस्को से बीबीसी संवाददाता सारा रेन्सफर्ड ने बताया है कि यूरोपीय देशों के नेताओं ने क्योटो संधि पर सहमति देने के बदले में रूस को विश्व व्यापार संगठन की सदस्यता दिलाने में सहायता करने का वादा किया है. फ़ैसला रूस ने अपने सकल घरेलू उत्पाद को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है. इसी सप्ताह शीर्ष रूसी वैज्ञानिकों ने भी समझौते को मंज़ूरी देने का विरोध किया था. उनका कहना था कि जलवायु परिवर्तन और ग्रीन हाउस गैसों के प्रसार के बीच संबंध का कोई सबूत नहीं मिला है. लेकिन इस मामले में पुतिन ने तमाम आंतरिक विरोधों को दरकिनार करते हुए हस्ताक्षर करने का फ़ैसला कर लिया, माना जा रहा है कि यूरोपीय देशों से संबंध बेहतर बनाने को उन्होंने प्राथमिकता दी है. इसके अलावा, विश्व व्यापार संगठन की सदस्यता में यूरोपीय देशों का मदद करने का वादा भी कारगर रहा है. |
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