|
बीबीसी ऑनलाइन के पाठकों की राय | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ज़ाहिर है, पूरी दुनिया की नज़रें अमरीकी चुनाव पर टिकी हैं, अमरीकी राष्ट्रपति कौन होगा इसका फ़ैसला तो अमरीका के मतदाता करेंगे लेकिन दुनिया भर के लोग इस बारे क्या राय रखते हैं यह जानने के लिए बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ऑनलाइन ने एक सर्वेक्षण आयोजित किया. इस सर्वेक्षण के मुताबिक़ 71 प्रतिशत लोगों का मानना है कि अमरीका का अगला राष्ट्रपति जॉन केरी को होना चाहिए जबकि जॉर्ज बुश को 20 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिला. इस सर्वेक्षण में दुनिया के सभी हिस्सों से लगभग 75 हज़ार लोगों ने हिस्सा लिया और उन्होंने बीबीसी की विभिन्न भाषाओं की वेबसाइट पर जाकर अपना मत प्रकट किया. जॉर्ज बुश को सबसे अधिक समर्थन फ़ारसी भाषा की वेबसाइट के पाठकों से मिला, लगभग 50 प्रतिशत फ़ारसी पाठकों ने बुश को राष्ट्रपति पद के लिए उपयुक्त माना जबकि उन्हें सबसे कम समर्थन उर्दू भाषा की वेबसाइट पर आने वाले लोगों से मिला, सिर्फ़ आठ प्रतिशत उर्दू पाठकों ने बुश को समर्थन दिया. जॉन केरी को व्यापक रूप से समर्थन मिला लेकिन सबसे अधिक समर्थन उन्हें उर्दू भाषा की वेबसाइट पर आने वाले पाठकों से मिला 84 प्रतिशत उर्दू पाठकों ने उनके पक्ष में मत डालने की बात कही. और अगर हिंदी ऑनलाइन के पाठकों की राय का जायज़ा लें तो उनमें से 80 फ़ीसदी ने केरी और 16 फ़ीसदी ने बुश के समर्थन में अपने वोट डाले हैं. इस सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाली महिला पाठकों में से 79 प्रतिशत ने केरी का साथ दिया है जबकि केरी के समर्थक पुरुषों का प्रतिशत 72 है. अगर क्षेत्रवार विश्लेषण करें तो बुश को सबसे अधिक समर्थन मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका से मिला, इस इलाक़े से 42 प्रतिशत लोगों ने बुश के प्रति समर्थन व्यक्त किया. लेकिन अपने ही इलाक़े यानी अमरीका में बुश को सिर्फ़ 14 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिला जबकि केरी को 78 प्रतिशत. कुछ गिनेचुने वोट इस चुनाव के तीसरे दावेदार राल्फ़ नादेर के हिस्से में भी आए हैं जिनमें बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के हिस्सा लेने वाले पाठकों में से तीन प्रतिशत का भी योगदान है. सर्वेक्षण को अलग-अलग श्रेणियों में आंका गया जिनमें आयुवर्ग के आधार पर आकलन भी शामिल था. इसमें भी सोलह से चौंतीस वर्ष आयुवर्ग के लोगों ने दिल खोल कर जॉन केरी का समर्थन किया है. यह सर्वेक्षण बीबीसी की अँगरेज़ी सहित कई भाषाओं की वेबसाइट पर कराए गए थे और इसमें बीबीसी के पाठकों ने हिस्सा लिया, इससे विश्व जनमत का संकेत मिल सकता है लेकिन अमरीकी चुनाव पर इसका असर पड़ने की कोई भविष्यवाणी नहीं की जा सकती. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||