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चुनाव में ज़ोर-शोर से जुटे दक्षिण एशियाई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका में इस बार के चुनाव में दक्षिण एशियाई मूल के लोगों ने काफ़ी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया है. दक्षिण एशियाई मूल के लोग रिपब्लिकन पार्टी और डेमोक्रेटिक पार्टी दोनों में शामिल भी हैं और इस तरह से इन पार्टियों के समर्थन में बँट भी गए हैं. वैसे ज़्यादातर दक्षिण एशियाई लोग डेमोक्रेटिक पार्टी को समर्थन देते हैं लेकिन रिपब्लिकन पार्टी के समर्थकों में भी दक्षिण एशियाई मूल के लोग शामिल हैं. डेमोक्रेटिक पार्टी को ज़्यादा समर्थन देने की वजह यह बताई जाती है कि इस पार्टी का आप्रवासिय़ों की ओर ज़्यादा झुकाव रहता है. चूँकि दक्षिण एशियाई मूल के लोगों में अधिकतर वे लोग हैं जो भारत और पाकिस्तान से अमरीका आकर बस गए हैं और अमरीकी नागरिकता ग्रहण कर ली है. ऐसे लोग रिपब्लिकन पार्टी के आप्रवासिय़ों के प्रति कड़े रुख से नाराज़ रहते हैं और डेमोक्रेटिक पार्टी को अपना शुभचिंतक समझते हैं. दख़ल नहीं अमरीका में लाखों की संख्या में होने के बावजूद अभी भी दक्षिण एशियाई मूल के लोगों का अमरीकी राजनीति में कोई खास दख़ल नहीं है.
राजनीति में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए किसी तरह का कोई कारगर संगठित तरीक़ा भी नहीं अपनाया गया है. और अब भी औरों के मुकाबले इस समुदाय में ऐसे बहुत कम लोग हैं जो वोट डालने के क़ाबिल हैं या जिन्होने वोट डालने के लिए अपना पंजीकरण तक करवाया है. लेकिन इस बार के चुनाव में इतनी काँटे की टक्कर है कि रिपब्लिकन पार्टी और डेमोक्रेटिक पार्टी दोनों की यह कोशिश है कि वह जितना भी वोट समेट सकते हैं समेट लें. इसलिए वह किसी भी समुदाय के लोगों को रिझाने की कोशिश किए बिना हार नहीं मानना चाहते हैं. इसीलिए बहुत से भारतीय और पाकिस्तानी मूल के लोगों को इन पार्टियों के सम्मेलनों में शामिल होने का मौक़ा मिल गया. भारतीय मूल के कई पेशेवर डॉक्टर रिपब्लिकन पार्टी के समर्थक हैं और उसके लिए चुनाव में काफ़ी धन भी इकठ्ठा करते हैं. रिपब्लिकन न्यूयार्क में रिपब्लिकन पार्टी के सम्मेलन में क़रीब एक दर्जन भारतीय मूल के लोग शामिल हुए जिनमे प्रमुख थे ज़ाक ज़करिया, अक्षय देसाई, विजयनगर और सुधीर पारिख.
बुश के लिए अपने समर्थन के बारे में विजयनगर कहते हैं, "मैं राष्ट्रपति जार्ज बुश का समर्थन इसलिए करता हूँ क्योंकि वह कुछ अहम मुददों पर जैसे शादी, गर्भपात और स्वतंत्र व्यापार के मामले में भारतीय समाज, सभ्यता और संस्कृति के अनुकूल ही विचार रखते हैं और उनके फिर से राष्ट्रपति बनने से भारत और भारतीय लोगों का भला होगा." इसी तरह बॉस्टन के डेमोक्रेटिक पार्टी के सम्मेलन में भी एक दर्जन के क़रीब भारतीय मूल के डेलिगेट्स् पहुँचे थे. डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जॉन केरी के दक्षिण एशियाई मूल के समर्थक ज़्यादा हैं. इनमें प्रमुख हैं व्यापारी संत सिंह चटवाल, ज़ुबैद अहमद, पराग सक्सेना और फ़िल्मकार इस्माइल मर्चेंट शामिल हैं. भारतीय और पाकिस्तानी मूल के रिपब्लिकन पार्टी और डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थक अपनी पार्टियों के चुनावी काम में आजकल जी-जान से जुटे हैं. बहुत से कार्यकर्ता तो अपने राज्यों को छोड़ उन राज्यों में वोट जुटाने पहुँच गए हैं जहाँ मुक़ाबला बहुत ही काँटे का है. जैसे न्यूयार्क से बहुत से डेमोक्रेटिक पार्टी के दक्षिण एशियाई समर्थक पेंसिलवेनिया, ओहायो और फ़्लोरिडा जैसे राज्यों में जाकर वोटर इकट्ठा करने में लग गए हैं. |
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