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फ़लूजा में हमले के ख़िलाफ़ चेतावनी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ के एक प्रमुख सुन्नी संगठन ने फ़लूजा में अमरीका के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना की किसी भी बड़ी सैनिक कार्रवाई के ख़िलाफ़ कड़ी चेतावनी दी है. सुन्नी मौलवी शेख़ हरीथ अल दारी ने इराक़ियों से अपील की है कि अगर फ़लूजा पर हमला होता है तो वे जनवरी में प्रस्तावित चुनावों का बहिष्कार करें. राजधानी बग़दाद में वरिष्ठ सुन्नी मौलवियों की बैठक के बाद उन्होंने यह बयान दिया. फ़लूजा में विद्रोहियों के ख़िलाफ़ अमरीका के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना की एक बड़ी कार्रवाई की अटकलें पिछले कुछ दिनों से चल रही हैं. पिछले सप्ताह इराक़ के प्रधानमंत्री ईयाद अलावी ने फ़लूजा के निवासियों को चेतावनी दी थी कि या तो वे अबू मुसाब ज़रक़ावी को सौंप दें अन्यथा हमला झेलें. वरिष्ठ सुन्नी मौलवियों की बैठक के बाद मुस्लिम विद्वानों की एसोसिएशन के प्रमुख अल दारी ने फ़लूजा में संभावित बड़ी सैनिक कार्रवाई को लेकर अपनी चिंता जताई. गंभीर नतीजे उन्होंने कहा, "बैठक में सिफ़ारिशें की गईं और कई फ़ैसले भी किए गए. जो गठबंधन सेना और इराक़ की अंतरिम सरकार के यह समझने के लिए काफ़ी हैं कि फ़लूजा पर हमला करना आसान बात नहीं." उन्होंने कहा कि फ़लूजा पर हमला करने के गंभीर नतीजे हो सकते हैं और इससे पैदा हुए ख़तरे का सामना दोनों पक्षों को करना पड़ेगा. अल दारी ने कहा कि इराक़ी लोग फ़लूजा को अपने प्रतिरोध और गर्व का प्रतीक मानते हैं और वहाँ हमला करने का कोई कारण भी नहीं है. एसोसिएशन ऑफ़ मुस्लिम स्कॉलर्स इराक़ में सुन्नी धार्मिक नेताओं का प्रमुख संगठन माना जाता है. हाल के महीनों में इस संगठन ने कई विदेशी बंधकों को चरमपंथियों गुटों के क़ब्ज़े से छुड़ाने की कोशिश की है. संगठन ने बंधकों की हत्या पर भी अपना विरोध जताया है. लेकिन संगठन इराक़ में अमरीकी सैनिकों की उपस्थिति के ख़िलाफ़ रहा है. पहले भी संगठन ने स्पष्ट किया है कि अगर अमरीकी सैनिक इराक़ में बने रहे तो वहाँ स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना संभव नहीं. |
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