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मंगलवार, 19 अक्तूबर, 2004 को 01:20 GMT तक के समाचार
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अमरीका में वोटिंग मशीनों में गड़बड़ी
मतदान
वोटों की गिनती दो नवंबर के मुख्य मतदान के बाद ही होगी
अमरीका के अनेक हिस्सों में राष्ट्रपति चुनाव के लिए शुरूआती वोटिंग हो रही है जिसे वहाँ 'अर्ली वोटिंग' कहा जा रहा है, इसका उद्देश्य दो नवंबर को होने वाले मतदान से पहले यह देखना है कि कहीं कोई तकनीकी समस्या तो नहीं है.

अर्ली वोटिंग में डाले गए मत दो नवंबर के मुख्य मतदान के बाद ही गिने जाएँगे.

अमरीकी चुनाव अधिकारी उम्मीद कर रहे हैं कि इस परीक्षण वोटिंग की वजह से पिछली बार की तरह अफरातफरी नहीं होगी लेकिन कई स्थानों से गड़बड़ियों के समाचार मिले हैं.

परीक्षण वोटिंग आयोवा, न्यू मैक्सिको और विस्कॉन्सिन जैसे राज्यों में शुरू हो चुकी है लेकिन लोगों का ध्यान फ़्लोरिडा पर टिका है जहाँ 2000 के चुनाव में भारी विवाद होने के बाद 'अर्ली वोटिंग' कराने का फ़ैसला किया गया है.

फ्लोरिडा में गड़बड़ी के आरोपों के बाद वोटों की दोबारा गिनती हुई थी, बुश बहुत कम अंतर से विजयी घोषित किए गए थे और अल गोर का व्हाइट हाउस पहुँचने का सपना अधूरा रह गया था.

गड़बड़ियाँ

इस बार के चुनाव के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है जिसमें मतदाता कंप्यूटर स्क्रीन को छूकर अपना वोट डाल रहे हैं.

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दोनों नेता मतदाताओं को रिझाने में जुटे

फ्लोरिडा से मशीनों में गड़बड़ी के समाचार मिले हैं, ओरलैंडो में मतदाताओं को दो घंटे तक इंतज़ार करना पड़ा क्योंकि कंप्यूटर ठप पड़ गए थे.

इसी तरह एक फ्लोरिडा में ही एक अन्य इलाक़े में वोटिंग बंद कर देनी पड़ी क्योंकि अधिकारियों ने पाया कि कंप्यूटर चुनाव मुख्यालय के नेटवर्क से जुड़े हुए नहीं थे.

चुनाव अधिकारियों का कहना है कि घबराने की कोई बात नहीं है और 'अर्ली वोटिंग' का मक़सद ही है कि ऐसी ग़लतियों का पता लगाकर उन्हें दूर कर लिया जाए.

प्रोत्साहन

रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों दलों के उम्मीदवार अपने समर्थकों को प्रोत्साहित कर रहे हैं कि वे अर्ली वोटिंग का फ़ायदा उठाएँ.

ज़ाहिर है, इस परीक्षण दौर में वही लोग वोट देने को राज़ी होंगे जो अपना मन बना चुके हैं कि वोट किसे देना है, अगले दो सप्ताह तक चलने वाले चुनाव प्रचार से उनका मन नहीं बदलने वाला.

जानकारों का कहना है कि इस बार के चुनाव में फ़ैसला वही मतदाता करेंगे जिन्होंने अभी तक अपना मन नहीं बनाया है, इन्हीं लोगों को रिझाने में दोनों उम्मीदवार लगे हैं.

यही वजह है कि बुश और केरी दोनों ही उन राज्यों पर अधिक ध्यान दे रहे हैं जहाँ सर्वेक्षणों के मुताबिक़ वोटों के प्रतिशत में मामूली बदलाव से हार-जीत का फ़ैसला हो सकता है.

फ्लोरिडा, ओहायो और कोलाराडो ऐसे राज्य हैं जिनके बारे में माना जाता है कि वहाँ जिसकी जीत होगी वही राष्ट्रपति बनेगा.

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