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गुरुवार, 07 अक्तूबर, 2004 को 23:22 GMT तक के समाचार
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'हमले का फ़ैसला सही साबित हुआ'
जॉर्ज बुश
बुश ने कहा कि रिपोर्ट ने उनके फ़ैसले को सही साबित किया
अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने यह स्वीकार किया है कि इराक़ में सैनिक कार्रवाई से पहले वह ख़ुफ़िया जानकारी ग़लत थी कि वहाँ महाविनाश के हथियार हैं.

लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इराक़ सर्वे ग्रुप की रिपोर्ट से कई महत्वपूर्ण नई जानकारियाँ सामने आई हैं जो इराक़ पर हमला करने के फ़ैसले को सही साबित करती हैं.

इराक़ सर्वे ग्रुप के प्रमुख चार्ल्स डेल्फ़र ने बुधवार को अमरीकी सीनेट के सामने अपनी रिपोर्ट पेश की थी और कहा था कि इराक़ में महाविनाश के हथियार के सबूत नहीं मिले.

हालाँकि उन्होंने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन हथियार कार्यक्रम फिर शुरू करने का इरादा रखते थे.

इराक़ सर्वे ग्रुप की रिपोर्ट आने के बाद राष्ट्रपति बुश और उनका प्रशासन अपने को सही साबित करने की कोशिश कर रहा है.

सही फ़ैसला

राष्ट्रपति बुश ने कहा कि रिपोर्ट से यह पता चलता है कि सद्दाम हुसैन संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहे थे और महाविनाश के हथियार भी बनाना चाहते थे.

 सद्दाम हुसैन चाहते थे कि दुनिया का ध्यान बँट जाए और वे अपना हथियार कार्यक्रम दोबारा शुरू कर दे. अभी तक जो जानकारी हमारे पास है. उसके आधार पर मेरा मानना है कि हमने इराक़ के ख़िलाफ़ सैनिक कार्रवाई का जो फ़ैसला किया, वह बिल्कुल सही था. सद्दाम हुसैन जेल में हैं और इस स्थिति में अमरीका ज़्यादा सुरक्षित है
जॉर्ज बुश, अमरीका के राष्ट्रपति

उन्होंने कहा, "सद्दाम हुसैन चाहते थे कि दुनिया का ध्यान बँट जाए और वे अपना हथियार कार्यक्रम दोबारा शुरू कर दे. अभी तक जो जानकारी हमारे पास है. उसके आधार पर मेरा मानना है कि हमने इराक़ के ख़िलाफ़ सैनिक कार्रवाई का जो फ़ैसला किया, वह बिल्कुल सही था. सद्दाम हुसैन जेल में हैं और इस स्थिति में अमरीका ज़्यादा सुरक्षित है."

डेल्फ़र रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी इराक़ के तेल के बदले अनाज कार्यक्रम में हुए भ्रष्टाचार में शामिल थे.

रिपोर्ट में कहा गया है कि भ्रष्टाचार में कई देशों के अधिकारी और कंपनियाँ भी लिप्त थीं, जिनमें अमरीका, रूस, चीन और फ़्रांस शामिल हैं.

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि पूर्व फ़्रांसीसी गृह मंत्री चार्ल्स पास्क़ा ने भी सद्दाम हुसैन से लाभ कमाया था.

वाशिंगटन स्थित फ़्रांसीसी दूतावास ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. दूतावास के एक प्रवक्ता ने कहा कि आरोप बिना किसी जाँच के हैं और फ़्रांस ने अमरीका को अपनी नाराज़गी बता दी है.

लेकिन अमरीका के उप राष्ट्रपति डिक चेनी ने कहा कि इसी कारण इराक़ के ख़िलाफ़ सैनिक कार्रवाई में बहुत कम देशों ने साथ दिया क्योंकि सद्दाम ने उन्हें ख़रीद लिया था.

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