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बंधक बनाए गए ईरानी राजनयिक रिहा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में अगस्त महीने की शुरुआत में बंधक बनाए गए ईरान के एक राजनयिक को रिहा कर दिया गया है. ईरानी टेलीविज़न का कहना है कि उसके संवाददाताओं ने उस राजनयिक फ़ेरीदून जहानी को बग़दाद स्थित ईरानी दूतावास में देखा है. ईरानी टेलीविज़न के अनुसार जहानी को एक अनजाने से गुट ने बंधक बना रखा था और उससे बातचीत के बाद जहानी की रिहाई संभव हो सकी. जहानी जब पद सँभालने के लिए कर्बला जा रहे थे तभी उन्हें बंधक बना लिया गया था. ईरानी टेलीविज़न के अनुसार अपहर्ता आख़िरकार इस बात से आश्वस्त हो गए कि इराक़ में मौजूद ईरानी राजनयिक वहाँ की स्थानीय राजनीति में हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं बल्कि वहाँ के ईरानी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए हैं. जहानी को 'इस्लामिक आर्मी ऑफ़ इराक़' नाम के एक संगठन ने बंधक बनाने का दावा किया था. इसके अलावा एक समय तो ऐसा भी था जब इस संगठन ने 24 घंटे के भीतर ही जहानी की हत्या करने की धमकी दी थी. इस संगठन ने ईरान-इराक़ युद्ध के समय के 500 युद्धबंदियों को ईरानी जेलों से रिहा करने की माँग रखी थी. ईरान का कहना था कि 16 वर्ष पहले समाप्त हुए इस युद्ध का कोई बंदी उसके पास नहीं है. इंटरनेट पर जहानी के परिचय पत्र की तस्वीरें जारी की गई थीं, जिसमें ईरानी विदेश मंत्रालय के रेस्तराँ के एक सदस्यता कार्ड की तस्वीर भी शामिल थी. |
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