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ईरान परमाणु कार्यक्रम पर नई रिपोर्ट | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
परमाणु मामलों पर नज़र रखने वाली संयुक्त राष्ट्र की संस्था अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी, आईएईए का कहना है कि ईरान यूरेनियम से वो रसायन बना रहा है जिससे परमाणु बम बनाया जा सकता है. इससे ये विवाद एक बार फिर शुरू हो गया है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिशों में जुटा है या नहीं. वैसे एजेंसी की रिपोर्ट का कहना है कि उसकी जाँच से इस आरोप की न तो पुष्टि होती और न ही उसका खंडन कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है. अमरीका का कहना है कि वह आईएईए के इस बयान से काफ़ी चिंतित है. अमरीका के विदेश उपमंत्री जॉन बोल्टन का कहना है कि इस मामले पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बहस कराने की ज़रूरत है. आईएईए दरअसल, यूरेनियम को और परिष्कृत कर यूरेनियम हेग्ज़ाफ़्लोराइड बनाया जाता है जिसे सेंट्रीफ़्यूज में तेज़ी से घुमाकर या तो परमाणु शक्ति बनाई जा सकती है या फिर परमाणु बम. आईएईए का कहना है कि ईरान 37 मीट्रिक टन यूरेनियम को और साफ़ कर उससे यूरेनियम हेग्ज़ाफ़्लोराइड बनाने की तैयारी कर रहा है. एक पश्चिमी राजनयिक ने बीबीसी को बताया है कि उनको ये लगता है कि ईरान अपने कार्यक्रम को कभी भी इससे अगले चरण पर ले जा सकता है. अमरीका का मानना है कि ईरान कुछ ही वर्षों में परमाणु हथियार बना सकेगा. दूसरी ओर, ईरान ये दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है और वो सिर्फ़ परमाणु ऊर्जा पैदा कर अपने नागरिकों को बिजली की आपूर्ति करना चाहता है. |
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