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डाइक ने ब्लेयर पर आरोप लगाए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी के पूर्व महानिदेशक ग्रेग डाइक ने ब्रिटेन सरकार और प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर की इराक़ नीति की कड़ी आलोचना की है. बीबीसी के पूर्व संवाददाता एंड्रयू गिलिगन ने भी सरकार और बीबीसी के वर्तमान पदाधिकारियों की जमकर आलोचना की है. अपनी किताब में डाइक ने लिखा है कि इराक़ मामले में सभी को धोखे में रखा गया, और इतिहास ब्लेयर को माफ़ नहीं करेगा. एक अख़बार ने किताब के अंश छापे हैं. डाइक के अनुसार ब्लेयर या तो सच जानने में सक्षम नहीं हैं, या फिर यह कहते हुए उन्होंने जानबूझकर झूठ बोला कि इराक़ 45 मिनट के भीतर महाविनाश के हथियारों से हमले कर सकता है. प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान में कहा है कि डाइक को अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार है, और वह उनके विचारों से सहमत नहीं है. गिलिगन भी बरसे डाइक को इराक़ संबंधी एक रिपोर्ट पर सरकार और बीबीसी के बीच उठे विवाद के बाद इस्तीफ़ा देना पड़ा था.
हटन आयोग की रिपोर्ट में डाइक की आलोचना की गई थी. एडिनबरा में एक कार्यक्रम में अपने भाषण में गिलिगन ने हटन रिपोर्ट की आलोचना करते हुए कहा, "मैं मानता हूँ कि मैंने भी ग़लतियाँ कीं लेकिन इससे कहीं ज़्यादा ग़लत थी लॉर्ड हटन की जाँच रिपोर्ट– जोकि संतुलित नहीं थी. और उसके बाद बीबीसी के गवर्नरों के क़दम जोकि घबराहट में उठाए गए." उन्होंने कहा, "ग्रेग डाइक को पद से हटाने के फ़ैसले से उन्होंने इस संकट को और भी गहरा और गंभीर बना दिया.” |
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