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'मारकाट मचाने वाले नजफ़ से निकलें' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ के वरिष्ठ शिया नेता आयतुल्ला अली सिस्तानी के प्रवक्ता मुर्तज़ा कश्मीरी ने कहा है कि नजफ़ कूच की अपील इसलिए की गई है ताकि वहाँ से हथियारबंद लोगों को हटाया जा सके. मुर्तज़ा कश्मीरी अयातुल्लाह अली सिस्तानी के प्रवक्ता होने के साथ साथ उनके दामाद भी हैं और इन दिनों लंदन में रह रहे हैं. बीबीसी हिंदी से एक विशेष बातचीत में मुर्तज़ा कश्मीरी ने ये तो कहा कि अली सिस्तानी नजफ़ में हज़रत इमाम अली के पवित्र मज़ार से हर तरह के हथियारबंद लोगों को अलग करना चाहते हैं, लेकिन अमरीकी फ़ौजों की इराक़ में मौजूदगी के सवाल को वो टाल गए. उनसे जब ये पूछा गया कि क्या सिर्फ़ नजफ़ से हथियारबंद लोगों को निकालने की बात हो रही है, इराक़ से अमरीकी फ़ौजों को हटाए जाने के बारे में उनकी क्या राय है? उनका जवाब था: "अभी सिर्फ़ नजफ़ की बात हो रही है, पूरे इराक़ की नहीं." शियाओं के पवित्र तीर्थ नजफ़ में पिछले कई दिनों से युवा शिया नेता मुक़्तदा अल सद्र की मेहदी सेना के लड़ाके अमरीकी और ब्रितानी फ़ौजों से लड़ रहे हैं. मुर्तज़ा कश्मीरी ने कहा- "नजफ़ से उन सभी लोगों को निकल जाना चाहिए जो क़त्लो-क़ताल (मारकाट) मचा रहे हैं." नजफ़ से मुक्तदा अल-सद्र के सैनिकों को हटाने की अली सिस्तानी की इस कोशिश के बारे में लोगों में अलग अलग तरह की राय है और कुछ लोग इसे अमरीका के प्रति हमदर्दी का संकेत मानते हैं. लेकिन इस पर मुर्तज़ा कश्मीरी ने सफ़ाई दी, "ये दुश्मन हैं, जो बोलना चाहते हैं बोल रहे हैं. हज़रत अयातुल्ला वही काम कर रहे हैं जो ख़ुदा की तरफ़ से उनको फ़र्ज़ दिया गया है. हम ऐसे लोगों की बातचीत की कोई परवाह नहीं करते." फ़तवा नहीं उनसे पूछा गया कि क्या मुक्तदा अल-सद्र के लोगों का भी कहना है कि वो अपने मुल्क के लिए लड़ते हैं, इस पर मुर्तज़ा कश्मीरी ने कहा कि हज़रत इमाम अली की मज़ार के अधिकारी अली सिस्तानी हैं और वहाँ उन्हीं की बात चलती है, हम किसी और की बात नहीं करते.
उन्होंने कहा कि नजफ़ चलने की अपील सिर्फ़ एक अपील है फ़तवा नहीं. इसका अर्थ ये हुआ कि इस मार्च में शामिल होने के लिए किसी पर कोई धार्मिक पाबंदी नहीं है, अगर कोई अपनी इच्छा से शामिल होना चाहे तो शामिल हो सकता है. अल सिस्तानी के प्रवक्ता से पूछा गया कि नजफ़ के बारे में चिंता है तो क्या पूरे इराक़ से अमरीकी फ़ौजों को हटाए जाने के बारे में इराक़ी नहीं सोचते? उन्होंने कहा, "अभी ये दूसरी बात है. उसका जवाब मेरे पास नहीं है. आने वाले दिनों में इस सवाल का जवाब मिल सकता है. आप एकदम छत तक नहीं पहुँच सकते. ज़ीने पर चढ़कर ही छत तक पहुँचा जा सकता है." |
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