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बुधवार, 14 जुलाई, 2004 को 12:33 GMT तक के समाचार
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बटलर ने ख़ुफ़िया संस्थाओं को कोसा
लॉर्ड बटलर
लॉर्ड बटलर ने प्रधानमंत्री कार्यालय की कोई सीधी आलोचना नहीं की है
इराक़ पर ख़ुफ़िया सूचनाओं की जाँच के बाद बटलर समिति ने ब्रितानी ख़ुफ़िया एजेंसियों की गंभीर आलोचना की है.

जाँच समिति ने कहा है कि इन ख़ुफ़िया सूचनाओं के आधार पर जो दस्तावेज़ तैयार किया गया था उसमें '45 मिनट में हथियार का उपयोग करने' का दावा नहीं करना चाहिए था.

लेकिन जाँच समिति ने कहा है कि इन सूचनाओं के आधार पर दस्तावेज़ बनाने के लिए ज़िम्मेदार जॉन स्कॉर्लेट को इस्तीफ़ा देने की आवश्यकता नहीं है.

समिति ने इस दस्तावेज़ की भाषा की भी आलोचना की है.

ख़ुफ़िया सूचनाओं की गुणवत्ता और दस्तावेज़ की विश्वसनीयता पर उठे सवालों के बाद ब्लेयर सरकार ने लॉर्ड रॉबिन बटलर की अध्यक्षता में इस पाँच सदस्यीय जाँच समिति की नियुक्ति की थी.

प्रधानमंत्री ब्लेयर ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह स्वीकार करते हुए कहा है कि अच्छी मंशा के बावजूद जो ग़लतियाँ सरकार से हुईं उसे वे स्वीकार करते हैं.

प्रमुख बिंदु
इराक़ के बारे में दी गई ख़ुफ़िया जानकारियों में गंभीर ख़ामियाँ थीं.
किसी भी जानकारी को तोड़मरोड़ कर पेश नहीं किया गया और न इसके उपयोग में लापरवाही बरती गई.
45 मिनट में हथियार तैनात करने की तैयारी के दावे में कोई दम नहीं था. इस दावे को दस्तावेज़ में शामिल करने से बचना चाहिए था.
खामियों के लिए सीधे तौर पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता.
प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए कहा है कि अब उनकी सरकार की नीयत पर शंका नहीं करनी चाहिए.

सीधी आलोचना नहीं

196 पृष्ठों की अपनी रिपोर्ट में लॉर्ड बटलर समिति ने प्रधानमंत्री की कोई सीधी आलोचना नहीं की है.

पाँच महीने की जाँच के बाद प्रकाशित की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि जब सरकार ने इराक़ और सद्दाम हुसैन पर अपना रूख़ कड़ा किया तो ग़लतियाँ हुईं.

समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इराक़ के हथियार कार्यक्रम के बारे में जो सूचनाएं दी गईं वे अपर्याप्त थीं.

लेकिन लॉर्ड बटलर ने अपनी रिपोर्ट में ज़ोर देकर कहा है कि ख़ुफ़िया एजेंसियों की रिपोर्ट में दी गई जानकारियों को न तो तोड़मरोड़कर पेश किया गया है और न इसमें जानबूझकर कोई लापरवाही बरती गई है.

लॉर्ड बटलर ने अपनी रिपोर्ट में इराक़ पर तैयार किए गए दस्तावेज़ के लिए सरकार की कोई सीधी आलोचना नहीं की है लेकिन कहा है कि उसमें यह दावा नहीं किया जाना चाहिए था कि 'इराक़ 45 मिनट में महाविनाश के हथियार तैयार कर सकता है'.

उल्लेखनीय है कि ब्रितानी सरकार के दस्तावेज़ में ऐसा दावा किया गया था और इस दावे को लेकर विवाद रहा है.

महाविनाश के हथियारों के बारे में जाँच समिति का कहना जल्दबाज़ी होगी कि महाविनाश के हथियार थे ही नहीं या वो कभी मिलेंगे ही नहीं.

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