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बटलर रिपोर्ट के मुख्य बिंदु | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ पर हमले के लिए उपयोग में लाई गई सूचनाओं की जाँच के बाद बटलर समिति ने अपनी रिपोर्ट पेश कर दी है. बुधवार को प्रकाशित की गई इस रिपोर्ट के मुख्य बिंदु : इराक़ के बारे में दी गई ख़ुफ़िया जानकारियों में गंभीर ख़ामियाँ थीं. किसी भी जानकारी को तोड़मरोड़ कर पेश नहीं किया गया और न इसके उपयोग में लापरवाही बरती गई. 45 मिनट में हथियार तैनात करने की तैयारी के दावे में कोई दम नहीं था. इस दावे को दस्तावेज़ में शामिल करने से बचना चाहिए था. खामियों के लिए सीधे तौर पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. नाइजर के बारे में जो दावे किए गए वे सिर्फ़ नकली दस्तावेज़ पर आधारित नहीं थे, और स्रोतों से भी जानकारियाँ थीं. जैविक हथियार बनाने को लेकर दावे करने वाली ख़ुफ़िया जानकारियाँ ग़लत साबित हुईं. इराक़ एक कठिन लक्ष्य था क्योंकि एक तो वहाँ का समाज खुला समाज नहीं था और दूसरे जाजूसी करने वालों को इस बात का डर था कि सद्दाम हुसैन उन्हें कड़ी सज़ा देंगे. इराक़ पर हमले की बढ़ती आशंका ने टोनी ब्लेयर को सितंबर 2002 का दस्तावेज़ प्रकाशित करने के लिए मजबूर किया. यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि इराक़ में महाविनाश के हथियार थे ही नहीं या उनके भविष्य में मिलने की कोई संभावना ही नहीं है. प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए कहा है कि अब उनकी सरकार की नीयत पर शंका नहीं करनी चाहिए. |
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