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बुधवार, 07 जुलाई, 2004 को 07:48 GMT तक के समाचार
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इराक़ में धमाकों के बीच सुरक्षा क़ानून
इराक़ी सैनिक
अलावी ने विद्रोहियों से निपटने के लिए एक नए क़ानून पर हस्ताक्षर किए हैं
इराक़ में एक ओर अंतरिम सरकार ने एक नया सुरक्षा क़ानून लागू किया है पर दूसरी ओर राजधानी बग़दाद में अंतरिम प्रधानमंत्री की पार्टी के कार्यालय के पास तोप के गोले गिरे हैं.

पुलिस के अनुसार बग़दाद शहर के मध्य में अंतरिम प्रधानमंत्री ईयाद अलावी की पार्टी के दफ़्तर के पास तोप के कई गोले गिरे.

इससे पहले बग़दाद में कई धमाके होने की ख़बर आई थी और जानकारी मिली थी कि कई लोग घायल हो गए हैं.

शहर में कई जगह रॉकेट से चलाए जाने वाले ग्रेनेड और अन्य हथियारों से लैस विद्रोहियों के साथ सुरक्षाकर्मियों की लड़ाई होने के भी समाचार मिले हैं.

नया क़ानून

नए सुरक्षा क़ानून के तहत अंतरिम प्रधानमंत्री अलावी को विद्रोहियों की चुनौती का सामना करने के लिए विशेष अधिकार मिल गए हैं.

उनके प्रवक्ता ने कहा है कि नए क़ानून पर हस्ताक्षर हो गए हैं.

बग़दाद स्थित बीबीसी संवाददाता के अनुसार इराक़ की नई अंतरिम सरकार ने अब तक जो क़ानून लागू किये हैं उनमें ये शायद सबसे महत्वपूर्ण है. इस क़ानून के बाद अंतरिम सरकार इराक़ में लगातार जारी सुरक्षा संबंधी समस्याओं से निपटने के लिए आपातकालीन अधिकारों के ज़रिए प्रभावी क़दम उठा सकेगी.

इस क़ानून के तहत इराक़ में ख़ास जगहों पर सीमित समय के लिए प्रशासन को सेना के हाथ में दिए जाने का प्रावधान है.

इससे प्रशासन कर्फ़्यू लगा सकता है, मार्शल लॉ घोषित कर सकता है, खोज और पूछताछ कर सकता है और प्रदर्शनों पर पूरी तरह प्रतिबंध भी लगा सकता है.

इस क़ानून के ज़रिए इराक़ के प्रधानमंत्री इयाद अलावी अब आपातकाल में बेहद ताक़तवर हो जाएँगे. कठिन परिस्थितियों में सेना और सुरक्षा बल पूरी तरह उनकी कमान में आ जाएँगे.

लेकिन नए क़ानून की कुछ सीमाएँ भी होंगी. इराक़ के कुर्द बहुल कुर्दिस्तान इलाक़े में स्थानीय सरकार की मदद के बग़ैर ये क़ानून लागू नहीं किया जा सकेगा.

इस क़ानून के ज़रिए इराक़ में चुनाव की तारीख नहीं बदली जा सकेगी.

हिंसा बढ़ी

पिछले कुछ महीनों में इराक़ में विदेशी और इराक़ी सुरक्षाकर्मियों के ख़िलाफ़ हिंसक घटनाएँ बढ़ी हैं.

हिंसक घटनाओं के डर से ही इराक़ में सत्ता हस्तांतरण भी निर्धारित तिथि से दो दिन पहले ही कर दिया गया था.

इराक़ में 28 जून को सत्ता हस्तांतरण के बाद की सबसे बड़ी हिंसक घटना में हाल में बक़ूबा शहर में कार बम विस्फोट हुआ था.

इस घटना में नौ लोग मारे गए थे और 35 से ज़्यादा घायल हो गए थे.

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