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कई देशों में लड़े थे मुक़रिन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अब्दुल अज़ीज़ अल-मुक़रिन सऊदी अरब में चरमपंथी संगठन अल-क़ायदा के मुख्य नेता थे. वह दुनिया के विभिन्न हिस्सों में संघर्षों में हिस्सा ले चुके थे. सऊदी नागरिक 31 वर्षीय मुक़रिन ने किशोरावस्था में ही चरमपंथी विचारधारा अपना ली थी और माना जाता है कि उन्होंने ओसामा बिन लादेन के साथ प्रशिक्षण पाया था जोकि उन्हीं की तरह सऊदी नागरिक हैं. अमरीका की तरफ़ झुकाव वाले सऊदी राजतंत्र से नाराज़गी रखने वाले मुक़रिन ने हाल के दिनों में देश में कई हिंसक हमलों को अंजाम दिया जिनका मक़सद सऊदी राजतंत्र को अस्थिर करना था. अमरीकी इंजीनियर पॉल जॉनसन की हत्या की ज़िम्मेदारी मुक़रिन के संगठन ने ही ली थी. लड़ाइयों का बड़ा अनुभव सऊदी अरब के सबसे वांछित व्यक्ति बने मुक़िरन ने हिंसक संघर्ष की दीक्षा अफ़ग़ानिस्तान में सोवियत सेना के ख़िलाफ़ लड़ते हुए ली थी. अफ़ग़ानिस्तान में ही बाद में वह अमरीका के ख़िलाफ़ तालेबान की तरफ़ से लड़े. मुक़रिन ने अलजीरिया, बोस्निया और हॉर्न ऑफ़ अफ़्रीका के इलाक़ों में लड़ाइयों में भाग लिया था. सोमालियाई अलगाववादियों के साथ लड़ते हुए वह 1990 के दशक में इथोपिया में पकड़े भी गए. वहाँ से मुक़रिन को सऊदी अरब प्रत्यर्पित कर दिया गया जहाँ उन्हें चार साल की क़ैद की सजा सुनाई गई. हालाँकि क़ुरान याद कर लेने के कारण उन्हें दो साल के बाद ही रिहा कर दिया गया. सऊदी अरब में हाल के महीनों में हुए कई हमलों के पीछे मुक़रिन के संगठन का हाथ माना जाता है. इंटरनेट पर प्रकाशित संदेशों में इस संगठन का नाम 'अरब प्रायद्वीप में अल-क़ायदा' बताया जाता है. |
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