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गुजरात, महाराष्ट्र भी काम नहीं आए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुख्य रूप से देश के औद्योगिक प्रदेश माने जाने वाले पश्चिमी राज्यों में भी न तो 'इंडिया शाइन' हुआ और न ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को जनता ने 'फ़ील गुड' करने दिया. फिर वह चाहे महाराष्ट्र हो या गुजरात दोनों ही प्रमुख राज्यों ने भाजपा को करारा झटका दिया है. देश के अप्रत्याशित नतीजों में से एक नतीजा गुजरात ने दिया है. चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों से लेकर एक्ज़िट पोल तक राज्य में कांग्रेस की उपस्थिति को दहाई के आँकड़े तक पहुँचाने के लिए तैयार नहीं थे. मगर मुक़ाबला ऐसा हुआ कि बस इसे बराबर का ही कहा जाए तो ग़लत नहीं होगा. गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी 'छोटे सरदार' बने देश भर में भाजपा की नैया पार करने के की कोशिश में लगे थे मगर ख़ुद अपना प्रदेश उनके हाथ से फिसलता रहा. मोदी ने पूरे चुनाव में सोनिया गाँधी पर ही निशाना साधे रखा मगर सोनिया के 'रोडशो' का असर चुनाव परिणामों में दिख रहा है. भाजपा कहाँ तक सभी 26 सीटें जीतने का दावा कर रही थी और वह 20 सीटें भी नहीं बचा सकी. उसे छह सीटों का नुक़सान हो गया. महाराष्ट्र में नुक़सान महाराष्ट्र में भाजपा को तीन सीटों का नुक़सान हुआ और शिवसेना की क़ीमत पर हुए इस नुक़सान का फ़ायदा लिया कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के गठबंधन ने.
भाजपा की स्थिति का अंदाज़ा इसी बात से लग सकता है कि महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई की छह सीटों में पिछली बार पाँच सीटें भाजपा-शिवसेना गठबंधन के पास थीं और कांग्रेस के हाथ सिर्फ़ सुनील दत्त की सीट ही थी. मगर इस बार पासा पूरी तरह पलट गया और पाँच सीटें कांग्रेस के पाले में चली गईं. शिवसेना की सीट सिर्फ़ मोहन रावले दक्षिण मुंबई से जीत सके. गोविंदा ने राम नाइक को, एकनाथ गायकवाड़ ने मनोहर जोशी को और मिलिंद देवड़ा ने जयवंतीबेन मेहता को हराया. उधर बारामती सीट से शरद पवार को भी जीत मिल गई. राजस्थान और पंजाब में फ़ायदा भाजपा को फ़ायदा हुआ तो राजस्थान और पंजाब में. राजस्थान में उसने विधानसभा चुनाव का प्रदर्शन दोहराया और पंजाब में पिछले लोकसभा में मिली हार का बदला चुका लिया.
राजस्थान में जहाँ उसे पाँच सीटों का फ़ायदा हुआ और उसने 21 सीटें जीतीं वहीं पंजाब में वह 13 में से 10 सीटें जीतने में क़ामयाब हुई. अभी वह इस जीत पर ख़ुश होती कि हरियाणा में उसे बड़ा नुक़सान हुआ और पार्टी 10 में से सिर्फ़ एक सीट जीत सकी. पिछली बार भाजपा और इंडियन नेशनल लोकदल को सभी 10 सीटों पर जीत हासिल हुई थी. अब इस पूरे माहौल में जब राजग को चौतरफ़ा नुक़सान हुआ है तो पश्चिमी भारत ने भी इसी का अनुसरण किया है और कांग्रेस नेता सोनिया गाँधी को दिल्ली दरबार जमाने के लिए कुछ प्रमुख चेहरे भेजे हैं. |
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