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"इराक़ में सैकड़ों मारे गए" | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में अमरीका के नेतृत्व वाली गठबंधन फ़ौजों ने माना है कि इराक़ में सद्दाम हुसैन के शासनकाल के बाद वहाँ सबसे ज़बरदस्त लड़ाई हुई है. अमरीकी ब्रिगेडियर जनरल मार्क किम्मिट ने माना है कि एक अप्रैल से हुई ताज़ा झड़पों में लगभग 700 इराक़ी और 70 सैनिक मारे गए हैं. अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने दावा किया है कि इराक़ में एक हफ़्ते की लड़ाई के बाद स्थिति सुधरी है. लेकिन अमरीकी कमांडरों ने इराक़ में स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए सैनिकों की दो और ब्रिगेड तैनात करने की माँग की है. कोशिश की जा रही है कि फ़लूजा में विद्रोहियों के साथ जिस संघर्षविराम पर सहमति हुई थी वह जारी रहे. उधर चीनी समाचार एजेंसी के हवाले से आई रिपोर्टों से ऐसे संकेत मिले हैं कि जिन सात चीनी नागरिकों को बंधक बनाया गया था उन्हें रिहा कर दिया गया है. इराक़ी विद्रोहियों ने सातों चीनियों को जॉर्डन से बग़दाद के रास्ते में फ़लूजा के पास रविवार को पकड़ा था. बताया गया है कि इराक़ में कई देशों के बीस से ज़्यादा नागरिक बंधक बनाए गए हैं.
जापानी बंधक इस बीच बंधक बनाए गए तीन जापानियों की रिहाई अब तक नहीं हो पाई है. पहले ऐसी ख़बरें आई थीं कि उन्हें रविवार को छोड़ा जा सकता है. चरमपंथियों ने जापान को इराक़ से अपने सैनिक निकालने के तीन दिन का समय देते हुए कहा था कि ऐसा नहीं होने पर बंधकों को जलाकर मार डाला जाएगा. जापान के प्रधानमंत्री जुनिचिरो कोइज़ुमि ने सोमवार को कहा कि उनका देश इराक़ से अपने 550 सैनिकों को वापस नहीं बुलाएगा. उन्होंने टोक्यो में अमरीकी उपराष्ट्रपति डिक चेनी से मुलाक़ात के बाद यह बयान दिया. |
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