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रूस ने नैटो विस्तार को ग़लती बताया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोफ़ ने कहा है कि रूस उत्तर अटलांटिक संधि संगठन यानी नैटो के पूर्वी यूरोप में हुए विस्तार को एक ग़लती मानता है. सात पूर्व कम्युनिस्ट देश नैटो में शामिल हो गए हैं और शुक्रवार को ब्रसेल्स में एक समारोह में उनका स्वागत किया गया है. ये देश हैं बल्गारिया, एस्तोनिया, लातविया, लिथुआनिया, रोमानिया, स्लोवाकिया और स्लोवेनिया. सोवियत संघ के विघटन से पहले इन देशों में कम्युनिस्ट सरकारें थी और ये देश सोवियत संघ के प्रभावक्षेत्र में थे. अब इन देशों के नैटो में शामिल हो जाने के बाद नैटो की फ़ौजें रूस की सीमाओं तक जा पहुँची हैं. 'भयभीत नहीं' रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने कहा है कि रूस नैटो के विस्तार से भयभीत नहीं है. लेकिन जर्मनी के चांसलर गेरहार्ड श्रोडर के साथ बातचीत के बाद उन्होंने माना कि रूस इस विषय में कुछ बातों को लेकर चिंतित ज़रूर है. उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि नैटो के विस्तार से रूस की सुरक्षा को कोई ख़तरा है. विदेश मंत्री सर्गेई लावरोफ़ ने कहा कि वे इस सच्चाई को मानते हैं कि नैटो का विस्तार हो गया है. लेकिन उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि नैटो रूस के साथ सहयोग करे. राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि वे नहीं चाहते कि 'बर्लिन की नई दीवारें' यूरोप का विभाजन करें. अंतरराष्ट्रीय 'आतंकवाद' की ओर इशारा करते हुए उनका कहना था कि वे नहीं मानते कि नैटो के विस्तार से आधुनिक युग के नए ख़तरों से बचा जा सकेगा. |
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