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ब्रिटेन के उच्चायुक्त का कश्मीर दौरा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में ब्रिटेन के उच्चायुक्त सर माइकल आर्थर ने गुरूवार को भारत प्रशासित कश्मीर में अलगाववादी नेताओं से बातचीत की है. सर माइकल तीन दिन के कश्मीर दौरे पर हैं. भारत में उच्चायुक्त का पदभार संभालने के बाद उनकी ये पहली कश्मीर यात्रा है. श्रीनगर पहुंचने पर वे सीधे प्रमुख अलगाववादी नेता और डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी के अध्यक्ष शब्बीर शाह के घर उनसे मिलने पहुँचे. वहाँ दोनों के बीच राज्य के मौजूदा हालात, भारत-पाकिस्तान संबंध और भारत सरकार और अलगाववादी संगठनों के एक गुट के बीच चल रही बातचीत पर चर्चा हुई. बाद में सर माइकल आर्थर जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के चेयरमैन यासीन मलिक से भी मिले और विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया. व्यापक दौरा इससे पहले बुधवार को उन्होंने राज्यपाल एस के सिन्हा, मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद और उप- मुख्यमंत्री मंगतराम शर्मा से भी जम्मू में मुलाकात की थी. इस बारे में ब्रितानी उच्चायोग ने कहा है कि ब्रिटेन सरकार राज्य में अमन क़ायम करने की मुफ्ती मोहम्मद सईद की सरकार की कोशिशों का स्वागत करती है.
इस बयान में भारत सरकार के उन प्रयासों की भी सराहना की गई जिसके तहत वो जम्मू और कश्मीर में सक्रिय सभी राजनीतिक ताक़तों के साथ बातचीत कर रही है. साथ ही इस बातचीत में शामिल होने के सर्वदलीय हुर्रियत कांफ्रेंस के फ़ैसले को सकारात्मक क़दम मानते हुये बयान में कहा गया, "हम बाक़ी सब को भी इसमें शामिल होने के लिये प्रोत्साहित करेंगे." शब्बीर शाह और यासीन मलिक दोनों ने बीबीसी संवाददाता अल्ताफ़ हुसैन को बताया कि उन्होंने ब्रिटेन के उच्चाययुक्त को कश्मीर में "भारतीय सेना के बढ़ते मानवाधिकार उल्लंघन" से जुड़ी बातों की जानकारी दी. शब्बीर शाह ने कहा कि उन्होंने ख़ासतौर पर ये साफ़ किया कि वह कश्मीर के शांतिपूर्ण हल के लिए पूरा सहयोग देने के लिये तैयार थे लेकिन "भारत सरकार ही पीछे हट गई." ब्रिटेन के उच्चायुक्त के साथ रक्षा सलाहकार समेत उच्चायोग के चार दूसरे सदस्य भी इस वार्ता में शामिल थे. सर माइकल विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सुरक्षाबलों और वाणिज्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण लोगों से भी मिलेंगे. |
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