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शनिवार, 20 मार्च, 2004 को 11:17 GMT तक के समाचार
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इराक़ हमले की बरसी पर विरोध प्रदर्शन
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ग्रीन पीस संगठन के दो प्रदर्शनकारी लंदन में बिग बेन टॉवर पर जा चढ़े
इराक़ पर हमले की पहली बरसी के मौक़े पर दुनिया भर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.

सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ रोम में हुआ जहाँ क़रीब तीन लाख लोगों ने शहर में रैली निकाली.

ब्रिटेन की राजधानी लंदन में भी हज़ारों लोग इराक़ पर हमले के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतर आए.

यहाँ दो प्रदर्शनकारी तो ब्रितानी संसद में स्थित प्रसिद्ध क्लॉक टॉवर बिग बेन पर जा चढ़े.

इनके अलावा मैड्रिड, टोक्यो, सिडनी, माँट्रियाल, न्यूयार्क, ब्राज़ील और मुंबई में बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शन किया.

न्यूयॉर्क, शिकागो, लॉस एंजिल्स सहित अमरीका के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए.

प्रदर्शनकारी इराक़ से तुरंत सेना वापसी की माँग कर रहे थे.

अमरीका के विभिन्न शहरों में क़रीब ढाई सौ रैलियाँ निकाली गईं.

हमले की बरसी को देखते हुए इराक़ में भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है. इस मौक़े पर वहाँ कोई विशेष आयोजन नहीं हुआ.

बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि इराक़ के ज़्यादातर लोग सद्दाम हुसैन सरकार के पतन से तो ख़ुश नज़र आए लेकिन वे गठबंधन सैनिकों के वहाँ रहने से नाराज़ हैं और वहाँ जल्द से जल्द अपनी सरकार चाहते हैं.

हमले की बरसी की पूर्व संध्या पर अपने संबोधन में अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा कि इराक़ पर मतभेद अब पुरानी बातें हो चुकी हैं.

उन्होंने कहा, "कमज़ोरी और पीछे हटने जैसे किसी भी क़दम से आतंकवादी हिंसा की गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और यह सभी देशों के लिए भी ख़तरनाक हो सकता है."

ऑस्ट्रेलिया से शुरुआत

शनिवार को दुनिया भर में होने वाले प्रदर्शनों की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड से हुई.

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सिडनी में प्रदर्शनकारी इराक़ से ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों को वापस बुलाने की माँग कर रहे थे

सिडनी में प्रदर्शनकारी माँग कर रहे थे कि ऑस्ट्रेलिया की सरकार इराक़ से अपने सैनिकों को वापस बुलाए.

ऑस्ट्रेलिया के दो हज़ार से ज़्यादा सैनिक इराक़ में तैनात हैं. ऑस्ट्रेलिया के अन्य नगरों में भी विरोध प्रदर्शन हुए हैं.

सिडनी में प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री जॉन हॉवर्ड का डेढ़ मीटर का पुतला लिए हुए थे जिसे एक पिंजरे में रखा गया था.

टोक्यो में क़रीब 30 हज़ार प्रदर्शनकारी नगर में मुख्य हिस्से से होकर गुजरे.

लोग जापान सरकार के उस फ़ैसले का विरोध कर रहे थे जिसके तहत वहाँ एक हज़ार जापानी सैनिक भेजे गए हैं.

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