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शनिवार, 06 मार्च, 2004 को 00:28 GMT तक के समाचार
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विचार-विमर्श के बाद ही करेंगे दस्तख़त
दस्तख़त यहीं होंगे
यह मेज़ है शाह फ़ैसल प्रथम की और इसी पर अंतरिम संविधान पर दस्तख़त होंगे. शाह फ़ैसल सुन्नी थे और उनको 1920 के दशक में ब्रिटेन ने इराक़ की गद्दी पर बिठाया था
इराक़ के शिया राजनेताओं का कहना है कि वे अपने धार्मिक नेता आयतुल्ला अल सिस्तानी से विचार-विमर्श करने के बाद ही देश के अंतरिम संविधान पर हस्ताक्षर करेंगे.

माना जा रहा है कि आयतुल्ला अल सिस्तानी की आपत्तियों के कारण ही शुक्रवार को अंतरिम संविधान पर हस्ताक्षर नहीं हो पाए.

सत्ता हस्तांतरण की व्यवस्था करने वाले इस अंतरिम संविधान पर दस्तख़त के लिए ज़बरदस्त तैयारी की गई थी.

लेकिन शासकीय परिषद के शिया सदस्य वहाँ नहीं आए.

इराक़ की शासकीय परिषद ने घोषणा की है कि अंतरिम संविधान पर सोमवार को दस्तख़त किए जाएँगे.

इराक़ में अमरीकी प्रशासन ने शुक्रवार को देर रात तक चली चर्चा के बाद कहा था कि संविधान पर आमतौर पर सहमति हो गई है.

इस बयान में कहा गया कि शासकीय परिषद की बैठक सोमवार को एक बार फिर होगी और कुछ मुद्दों पर अंतिम चर्चा के बाद अंतरिम संविधान पर दस्तख़त किए जाएँगे.

कई सप्ताह की गहन बहस के बाद शुक्रवार को इस संविधान पर दस्तख़त होने थे लेकिन अंतरिम शासकीय परिषद के कुछ सदस्यों के ऐतराज़ की वजह से यह काम पूरा नहीं हो पाया.

अमरीका की नियुक्त की हुई शासकीय परिषद में कुछ सूत्रों ने कहा कि परिषद के दो शिया सदस्यों ने पूर्व सहमत संविधान में आख़िरी समय में दो महत्वपूर्ण संशोधन करने पर ज़ोर दिया.

ऐतराज़ करने वालों में से एक अहमद चलाबी भी हैं जो अमरीका के नज़दीकी माने जाते हैं.

ऐतराज़

संवाददाताओं का कहना है कि कुछ शिया सदस्य संविधान के मसौदे में जिन संशोधनों की माँग कर रहे हैं उनसे देश में सुन्नियों और कुर्दों के मुक़ाबले शियाओं की स्थिति ज़्यादा मज़बूत हो जाएगी.

इराक़ी परिषद के सदस्य
परिषद के कुछ सदस्यों को अंतरिम संविधान के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति है

कहा यह भी जा रहा है कि अंतरिम संविधान लागू करने में अगर देरी होती है तो उससे सत्ता हस्तांतरण में भी देरी होगी.

सूत्रों का कहना है कि ये सदस्य अब माँग कर रहे हैं कि राष्ट्रपति पद की ज़िम्मेदारी एक छोटी सी परिषद को दी जानी चाहिए जिसमें तीन शिया, एक सुन्नी और एक कुर्द प्रतिनिधि हों.

पहले सहमति हुई थी कि एक राष्ट्रपति होगा और दो उपराष्ट्रपति. ये सदस्य स्थाई संविधान की मंज़ूरी की प्रक्रिया पर भी कुछ आपत्ति कर रहे हैं.

अंतरिम संविधान में व्यवस्था की गई है कि स्थाई संविधान में अगर इराक़ को एक इस्लामी राज्य बनाने की कोशिश की जाती है तो सुन्नियों, कुर्दों और उदारवादी शियाओं को उस पर वीटो करने का अधिकार होगा.

अंतरिम संविधान में व्यवस्था की गई है कि अमरीका इसी साल 30 जून तक सत्ता इराक़ियों को सौंप देगा.

जबकि बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अंतिरम संविधान के मसौदे में यह नहीं बताया गया है कि सत्ता किसको और किस तरह सौंपी जाएगी.

अंतरिम संविधान तब तक लागू रहेगा जब तक कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई एक संसद नया संविधान नहीं बना लेती. वही देश का स्थाई संविधान होगा.

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