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'बर्ड फ़्लू' पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
'बर्ड फ़्लू' से निपटने की कार्य योजना बनाने के लिए बैंकॉक में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरु हो गया है. इस सम्मेलन का आयोजन थाइलैंड सरकार ने किया है. अब तक इस बीमारी के चलते कई लाख मुर्गियों को मारा जा चुका है लेकिन अब स्वास्थ्य अधिकारी कह रहे हैं कि इतनी बड़ी संख्या में मुर्गियों के मारे जाने से भी संक्रमण का ख़तरा है. इस बीच इस बीमारी से वियतनाम में दो और लोगों के मौत हो जाने की ख़बरें हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस बीमारी से पीड़ित देशों से कहा है कि वे बीमारी से जुड़ी ख़बरों को ज़ाहिर करने में ईमानदारी बरतें. वैज्ञानिकों को डर है कि यदि 'बर्ड फ़्लू' के वायरस मनुष्यों के शरीर में जाकर कोई नया वायरस विकसित कर गए तो यह महामारी का रुप ले सकती है. जब तक 'बर्ड फ़्लू' के लिए कोई टीका नहीं बना लेते तब तक पक्षियों को मारना ही एक मात्र विकल्प है. यह टीका विकसित करने में कम से कम छह महीने का समय लग सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि अब तक लगभग दो करोड़ मुर्गियों को मारा जा चुका है और उनको मारा जाना जारी है. संक्रमण की चिंता विश्व स्वास्थ्य संगठन की चिंता अब मुर्गियों को मारने की विधि पर केंद्रित हो गई है.
उसका कहना है कि मुर्गियों को मारने वाले फ़ार्म कर्मियों को संक्रमण से बचाने के उपाय करने ज़रुरी हैं. जापान ने प्लास्टिक की थैलियों बंद करके उनको मारा है लेकिन चूँकि उन्हें बीस हज़ार मुर्गियों को मारना था इसलिए वे ऐसा खर्चीला उपाय अपना पाए. लेकिन बाक़ी देशों ने मुर्गियों को ज़िंदा दफ़नाने का तरीक़ा अपना लिया है, जो सुरक्षित तो है लेकिन अमानवीय है. संगठन चाहता है कि लोग 'बर्ड फ़्लू' से पीड़ित पक्षियों को मारते समय अपने आपको पूरी तरह ढँक कर रखें जिससे कि संक्रमण का ख़तरा न रहे. उल्लेखनीय है कि वियतनाम में 'बर्ड फ़्लू' के संक्रमण से अब तक आठ और थाइलैंड में दो लोगों की मौत हो चुकी है. 'बर्ड फ़्लू' अब तक एशिया के आठ से अधिक देशों में फैल चुका है. |
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