|
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चुनाव की संभावनाओं का जायज़ा लेने का आग्रह
अमरीका और इराक़ी शासकीय परिषद ने संयुक्त राष्ट्र से इराक़ में मई महीने तक प्रत्यक्ष चुनाव की संभावनाओं का जायज़ा लेने के लिए एक टीम भेजने का आग्रह किया है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने कहा है कि इस बारे में कोई भी फ़ैसला लिए जाने से पहले और विचार-विमर्श की ज़रूरत है. न्यूयॉर्क में इराक़ी शासकीय परिषद के प्रतिनिधियों से बातचीत के बाद अन्नान ने कहा कि जुलाई के बाद संयुक्त राष्ट्र की इराक़ में कोई भूमिका होगी. अमरीका ने संयुक्त राष्ट्र के बग़दाद कार्यालय पर बम हमले के बाद वापस बुलाए गए कर्मचारियों की फिर से तैनाती की माँग की थी. प्रदर्शन इससे पहले सोमवार को इराक़ में हज़ारों शिया मुसलमानों ने सत्ता हस्तांतरण के अमरीकी प्रस्ताव के विरोध में प्रदर्शन किया. मुख्य प्रदर्शन राजधानी बग़दाद और दक्षिणी शहर बसरा में हुए. विरोध प्रदर्शन में हज़ारों की संख्या में शिया मुसलमान आम चुनाव की माँग के नारे लगा रहे थे. एक नारा था- इलेक्शन करो, सेलेक्शन नहीं. उल्लेखनीय है कि अमरीका इराक़ में एक ऐसे अंतरिम प्रशासन के पक्ष में हैं जिसके सदस्य प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रक्रिया से नहीं चुने गए होंगे. शियाओं का डर बग़दाद में बीबीसी संवाददाता कैरोलीन हॉली के अनुसार सद्दाम हुसैन के शासन के दौरान वर्षों तक हाशिये पर रखे गए शिया समुदाय को डर है कि कहीं अमरीकी योजना में एक बार फिर वे पीछे न छूट जाएँ. इससे पहले प्रमुख शिया नेता अयातुल्ला अली अल-सिस्तानी अमरीकी योजना का विरोध कर चुके हैं. सिस्तानी के एक प्रतिनिधि हाशिम अल-अवद ने बग़दाद रैली में कहा, "इराक़ी जनता प्रत्यक्ष चुनावों पर आधारित राजनीतिक व्यवस्था चाहती है." |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||