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इराक़ के लिए धन जुटाने में कठिनाइयाँ
इराक़ के पुनर्निर्माण के लिए धन जुटाने को लेकर स्पेन की राजधानी मैड्रिड में बैठक शुरु हो गई है. अमरीकी अधिकारियों ने इस बैठक से काफ़ी उम्मीदें बाँध रखी हैं. संयुक्त राष्ट्र और विश्व बैंक के एक आकलन के अनुसार इराक़ के पुनर्निर्माण के लिए अगले चार साल में लगभग 56 अरब डॉलर की ज़रूरत होगी. संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने बैठक की शुरुआत में कहा, "इराक़ में बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण की ज़रूरत है और युद्ध के बाद इराक़ में सुरक्षा सबसे अहम प्राथमिकता है." उन्होंने कहा कि ये इराक़ियों के लिए उम्मीद की घड़ी है लेकिन उन्हें अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आश्वासन की ज़रूरत है कि देश में लोकतंत्र कायम करने में उनकी मदद की जाएगी. खाड़ी के देशों ने फ़िलहाल मदद का कोई वायदा नहीं किया है. फ़्रांस, जर्मनी जैसे देश जो युद्ध के ख़िलाफ़ थे, पुनर्निर्माण के लिए धनराशि देने में हिचकिचा रहे हैं. वॉशिंगटन स्थित बीबीसी संवाददाता जॉन लाइन के अनुसार अमरीका के लिए चुनौती काफ़ी मुश्किलें खड़ी करने वाली है.
अभी कुछ ही सप्ताह पहले तक लग रहा था कि मैड्रिड में होने वाला ये सम्मेलन अमरीका को उलझन में डालने वाला हो सकता है क्योंकि दुनिया के बाक़ी देशों की ओर से इराक़ के लिए बहुत ही कम धन दिया जा रहा था. दानकर्ता अमरीका के अलावा जो बड़े दानकर्ता देश सामने आए हैं उनमें जापान का नाम प्रमुख है जिसने लगभग डेढ़ अरब डॉलर देने का वादा किया है. ब्रिटेन ने 90 करोड़ डॉलर देने की बात कही है. जो भी देश अब धन देना चाहते हैं उनके लिए इंतज़ाम किया गया है कि वे धनराशि नए ट्रस्ट को दे सकते हैं जिससे वे यह कह सकें कि वे एक अंतरराष्ट्रीय संस्था को धन दे रहे हैं न कि अमरीकियों को. इसी तरह संयुक्त राष्ट्र का नया प्रस्ताव सहायता की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों को और समर्थन देता है. इसलिए अब अमरीका का ये कहना है कि ये सम्मेलन काफ़ी सफल होगा भले ही ऑकड़ों को लेकर कुछ मतभेद हों. सम्मेलन में एक बड़ा सवाल ये होगा कि जितना भी धन देने की घोषणा कर दी जाए मगर असल में कितना धन दिया जाता है. साथ ही ये भी देखना होगा कि मैड्रिड में इकट्ठा हो रहे देशों को धन देने के लिए मनाने में कितना समय लगेगा. |
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