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'आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई' पर रम्सफ़ेल्ड को शक
अमरीकी रक्षा मंत्री डोनल्ड रम्सफ़ेल्ड को 'आतंकवाद के ख़िलाफ़' अमरीका की लड़ाई को लेकर शक है. मंत्रालय से लीक हो गए एक दस्तावेज़ के मुताबिक़ रम्सफ़ेल्ड ने अफ़गानिस्तान और इराक़ में चल रही लड़ाई को 'लंबी और बेहद नीरस' बताया है. पेंटागन के वरिष्ठ नागरिक और सैन्य अधिकारियों को भेजा गया रम्सफ़ेल्ड का शासकीय पत्र 'यूएसए टुडे' में प्रकाशित हुआ है. इसमें रम्सफ़ेल्ड ने सवाल उठाया है कि क्या अमरीका यह जानता है कि वह 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई' में जीत भी रहा है या नहीं. कई सवाल इस शासकीय पत्र में कई बड़े सवाल उठाए हैं. मसलन अल क़ायदा को लेकर इसमें कहा गया है कि इस संगठन को लेकर मिले आंकड़े आधे अधूरे से हैं. इसके अनुसार अमरीका के पास यह जानने का कोई तरीक़ा नहीं है कि वह जितने 'आतंकवादी' पकड़ रहा है या मार रहा है उसकी तुलना में ज़्यादा लोग भर्ती तो नहीं किए जा रहे हैं. अमरीकी अधिकारियों ने इस पत्र को छोटा मसला बताते हुए कहा है कि रम्सफ़ेल्ड वरिष्ठ सहयोगियों से सिर्फ़ बड़े मुद्दों के बारे में बात कर रहे थे. पेंटागन के प्रवक्ता और रम्सफ़ेल्ड के विशेष सहायक लैरी डी रीटा ने इस शासकीय पत्र की प्रामाणिकता की पुष्टि की है लेकिन उनका कहना है कि इसमें सिर्फ़ यह बताने की कोशिश की गई है कि अधिकारियों को 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई' पर इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान के बाहर भी देखना चाहिए. लेकिन बीबीसी के पेंटागन संवाददाता निक चाइल्ड्स का कहना है कि इस शासकीय पत्र से अमरीकी संसद और बाहर भी 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई' को लेकर अमरीकी नीति पर सवाल खड़े किए जाएँगे. |
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