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अमरीका से नाराज़ हैं मुसलमान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अरब देशों और अन्य मुस्लिम देशों में अमरीका को लेकर नाराज़गी चिंतित करने के हद तक बढ़ रही है. यह रिपोर्ट अमरीकी सरकार ने तैयार करवाई है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि समस्या इसलिए बड़ी हो गई है क्योंकि अमरीका अपनी नीतियों और उस पर की गई कार्रवाइयों को ठीक तरह से समझाने में विफल रहा है. इससे पहले जून में एक स्वतंत्र एजेंसी ने एक सर्वेक्षण के बाद कहा था कि इराक़ पर हमले के बाद से तुर्की और नाइजीरिया जैसे मुस्लिम देशों और सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया में अमरीका विरोधी भावना बढ़ती जा रही है. इस नई रिपोर्ट को तैयार करने वाली टीम ने अमरीकी सरकार को अपनी नीतियों के प्रचार प्रसार के लिए ज़्यादा पैसा खर्च करने की सलाह दी है और अरबी बोलने वाले कूटनीतिकों के चयन की सलाह दी है. बीबीसी संवाददाता जॉन लीन का कहना है कि इस रिपोर्ट की किसी भी बात से किसी को आश्चर्य नहीं हुआ है. सिवाय इसके कि यह रिपोर्ट सरकार की बनाई हुई एक टीम ने तैयार की है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अमरीका का कथित जनसंपर्क और उसकी कूटनीति काम नहीं आ रही है और अब अमरीका को अपनी छवि सुधारने के लिए अधिक पैसा खर्च करना चाहिए. पैनल के सदस्य जॉन ज़ॉग्बी ने कहा है, ''अब यह समस्या गंभीर है...मुस्लिम देशों और अरब में अमरीका की स्थिति इससे बुरी नहीं हो सकती.'' एक दूसरे सदस्य ने कहा कि अरब देशों और दूसरे मुस्लिम देशों में चल रहे वाद विवाद में अमरीका भाग ही नहीं ले रहा है. हल इस रिपोर्ट के अनुसार इंडोनेशिया में अमरीका का पक्ष लेने वाले सिर्फ़ 15 प्रतिशत रह गए हैं जबकि 2002 में उनकी संख्या 60 प्रतिशत थी. इसी तरह जॉर्डन में 2002 की गर्मियों में 25 फ़ीसदी लोग अमरीका का समर्थन करते थे लेकिन 2003 में बसंत का मौसम आते आते तक उनकी संख्या एक फ़ीसदी ही रह गई. रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि विदेश मंत्रालय को दो साल के भीतर तीन सौ ऐसे लोगों की भर्ती करनी चाहिए जो अच्छी तरह अरबी बोलते हों और 2008 तक ऐसे 300 लोगों की और भर्ती की जानी चाहिए. अमरीका में अधिक से अधिक मुस्लिमों को छात्रवृति देने की सलाह भी दी गई है और अरब देशों में रेडियो प्रसारण बढ़ाने का सुझाव दिया गया है. रिपोर्ट के अनुसार इसराइल और फ़लस्तीन के बीच चल रहे विवाद और इराक़ की समस्या के कारण अच्छे संबंध बनाने में बाधा आ रही है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस रिपोर्ट का विदेश मंत्रालय तो स्वागत करेगा लेकिन अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय को इससे विशेष खुशी नहीं होगी क्योंकि उसे दुनिया को सफ़ाई देने की ज़रुरत ही महसूस नहीं होती. |
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