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हमास को एफ़बीआई का पैसा
अमरीकी जाँच एजेंसी एफ़बीआई ने फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास को गोपनीय रूप से हज़ारों डॉलर देने के बारे में पता चला है. एजेंसी ने ये रकम राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के शासन के दौरान इसलिए दी ताकि चरमपंथियों को मिलनेवाले धन के बारे में पता चल सके. मगर समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार अमरीकी एजेंसी का इस प्रयास पर पानी फिर गया. एजेंसी के अनुसार अमरीकी संस्था ने इसके लिए अपने मुख्य आदमी हैरी एलेन को लगाया था जो एरिज़ोना के व्यवसायी हैं और उन्होंने इस्लाम क़बूल कर लिया था. मगर हैरी की एजेंसी से अनबन हो गई और उन्होंने अपना संबंध तोड़ लिया. हैरी एलेन के प्रशंसक एफ़बीआई पर आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने फ़लस्तीनी संगठनों के बारे में जानकारी पाने का एक कीमती मौक़ा गँवा दिया है. हैरी एक चैरिटी कार्यकर्ता का काम कर रहे थे और उनकी मुलाक़ात हमास के वरिष्ठ नेताओं से लेकर फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात तक से हो चुकी थी. एफ़बीआई का अभियान समाचार एजेंसी एपी के अनुसार एफ़बीआई ने इस अभियान के नाक़ाम रहने की पुष्टि की है. उसने कहा है कि इस अभियान के लिए उन्होंने अमरीकी एटर्नी जनरल जेनेट रेनो से अनुमति ली थी और इसराइली ख़ुफ़िया विभाग से भी सहयोग लिया था. लेकनि तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सैंडी बर्गर का कहना है कि राष्ट्रपति कार्यालय को एफ़बीआई की गतिविधियों की जानकारी नहीं दी गई थी.
1998 में जिस वक़्त क्लिंटन इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच वे शांति समझौते के लिए बातचीत कर रहे थे उसी वक़्त एफ़बीआई हैरी एलेन के माध्यम से हमास को पैसा दिलवा रही थी. समाचार एजेंसी के अनुसार हैरी ने एफ़बीआई को गज़ा में उनके मुस्लिम संगठन पर निगरानी के अलावा एरिज़ोना में उनके घर और काम काज की निगरानी भी करने दी. इस व्यवसायी का कहना है कि वह 'एक अच्छे अमरीकी' के तौर पर यह काम कर रहे थे. पूर्व एटर्नी मेल्विन मैकडोनल्ड ने एफ़बीआई पर एक महत्वपूर्ण अवसर गँवाने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा,"मध्य पूर्व में इस तरह के संपर्क वाले लोग हमारे पास बहुत कम हैं". प्रेम से उपजा मतभेद हैरी एलेन ने अपने एक साथी के आप्रवास के बारे में एक मामले के दौरान अदालत में ये जानकारी दी कि उन्होंने 1998 में गज़ा में हमास नेता इस्माइल अबू शानाब को तीन हज़ार से पाँच हज़ार डॉलर दिए. इस्माइल अबू शानाब की इस साल इसराइली हवाई हमले में मौत हो गई थी. एफ़बीआई के आदमी ने उन्हें बताया था कि हमास इस पैसे का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए करेगा मगर हुआ ये कि शानाब ने ये पैसे फ़लस्तीनी शरणार्थियों और स्वास्थ्य सुविधाओं पर ख़र्च कर दिए. 1999 में अचानक हैरी और एफ़बीआई के बीच कई मामलों पर मतभेदों के बाद संबंध ख़त्म हो गए. इन मतभेदों की शुरूआत चीन की एक महिला को लेकर हुई जिनके बारे में जासूस होने का संदेह जताया गया और कहा गया कि हैरी के उनके साथ प्रेम संबंध हैं. अमरीका ने 1997 में हमास को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया था. |
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