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मंगलवार, 07 अक्तूबर, 2003 को 16:11 GMT तक के समाचार
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क्या है हमास
हमास के चरमपंथी
हमास का गठन 1987 के फ़लस्तीनी जन आँदोलन के दौरान हुआ था

हमास फ़लस्तीनी क्षेत्र का सबसे प्रमुख इस्लामी चरमपंथी संगठन है.

इसका गठन 1987 के जनआंदोलन के दौरान हुआ था.

उसके बाद से ये फ़लस्तीनी क्षेत्रों से इसराइली सेना को हटाने के लिए संघर्ष चला रहा है.

हमास इसराइल को मान्यता नहीं देता और यह पूरे फ़लस्तीनी क्षेत्र में इस्लामी राष्ट्र की स्थापना करना चाहता है.

दो इकाइयाँ

शेख अहमद यासिन के नेतृत्व में चलाए जा रहे इस संगठन की राजनीतिक और सशस्त्र इकाइयाँ हैं.

राजनीतिक इकाई ने पश्चिमी किनारे और ग़ज़ा पट्टी में अस्पताल और स्कूल बनवाए हैं और यह स्थानीय लोगों की सामाजिक और धार्मिक मामलों में सहायता करती है.

हमास की सशस्त्र इकाई इसराइली ठिकानों पर हमले करती है.

शेख़ अहमद यासिन
समर्थकों के साथ हमास के नेता शेख़ अहमद यासिन

सितंबर 2000 में दूसरे इंतफ़दा की शुरूआत के बाद से हमास ने इसराइली क्षेत्रों में कई आत्मघाती हमले किए हैं.

इससे पहले अपने एक नेता याह्या अय्याश की हत्या के बाद हमास कार्यकर्ताओं ने 1996 में फ़रवरी-मार्च में इसराइल में कई बम धमाके किए.

इन धमाकों में कुल मिलाकर 60 इसराइली मारे गए और मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया कुछ समय के लिए ठप्प हो गई.

कार्यकर्ता और नेता

संगठन के सदस्यों की संख्या का सही अंदाज़ा लगाना तो मुश्क़िल है लेकिन इसके पक्के समर्थकों की संख्य हज़ारों में होगी.

दिसंबर 2002 मे हमास की स्थापना की पंद्रहवीं वर्षगाँठ पर आयोजित एक रैली में लगभग चालीस हज़ार लोग इकठ्ठा हुए.

हमास ग़ज़ा पट्टी में ख़ासा लोकप्रिय है, जहाँ पश्चिमी किनारे की तुलना में ग़रीबी अधिक है.

हमास के सबसे प्रभावशाली अध्यात्मिक नेता शेख़ अहमद यासीन को फ़िलस्तीनी इस्लामी आंदोलन का उदार चेहरा माना जाता है.

हमास चरमपंथी
हमास के सदस्य आत्मघाती हमले करते हैं

लेकिन कई बार वे ऐसे बयान देते रहे हैं जिन्हें भड़काने वाला माना जाता है.

लकवाग्रस्त शेख़ अहमद यासीन को 1997 में इसराइली जेल से रिहा किया गया था.

उनकी रिहाई के बदले में जॉर्डन के शाह मसूद को इसराइली ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद के कुछ एजेंटों को अम्मान जेल से रिहा करना पड़ा.

रिहाई के बाद शेख़ यासिन ने अपना सारा ध्यान इस्लामी कल्याणकारी संस्थाओं की हालत सुधारने में लगा दिया जो इसराइली हमलों में तबाह हो गई थीं.

प्रतिद्वंद्विता

यासिर अराफ़ात का फ़लस्तीनी प्राधिकरण भी हमास को एक बड़ी चुनौती के तौर पर देखा करता था.

इसके बावजूद अराफ़ात का हमेशा यह प्रयास रहा कि हमास को मुख्यधारा की राजनीति से जोड़कर रखा जाए.

उन्होंने हमास से फ़लस्तीनी प्राधिकरण को एकमात्र राष्ट्रीय सरकार के रूप में मान्यता देने और हिंसा बंद बंद करने की कई अपीलें भी कीं.

लेकिन हमास ने कहा कि इस प्राधिकरण को मान्यता देने का मतलब है ओस्लो शांति समझौते को स्वीकार करना.

हमास का मानना है कि ओस्लो समझौता अमरीका, इसराइल और फ़लस्तीनी प्राधिकरण के बीच हुआ एक सौदा है जिससे फ़लस्तीनियों का भला नहीं होगा.

आंतरिक मतभेद

हमास के नेतृत्व में कई बातों पर असहमति है. कुछ नेता मानते हैं कि हमास को फ़लस्तीनी राजनीति में विपक्ष की भूमिका निभानी चाहिए.

1996 में इसराइल की कड़ी जवाबी कार्रवाई के बाद से कई उदारवादी नेता मानने लगे कि आत्मघाती बम हमलों से कुछ हासिल नहीं होगा.

उस समय इसराइली सैनिकों ने हमास के कई सदस्यों को या तो मार डाला था या गिरफ़्तार कर लिया था.

लेकिन कुछ अन्य नेताओं का मानना है कि इसराइली 'अत्याचार' से निबटने के लिए सशस्त्र गुट का सक्रिय रहना ज़रूरी है.

यही वजह है कि हमास ने एक तरफ़ अपना हथियारबंद अभियान जारी रखा है, वहीं राजनीतिक मंच पर फ़लस्तीनी प्राधिकरण के साथ सह-अस्तित्व का रास्ता अपनाता है.

हमास का यही कहना रहा है कि फ़लस्तीनी जनता की एकता को बनाए रखने के लिए वह पीए के साथ किसी तरह के संघर्ष में नहीं उलझेगा.

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