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भारत और आसियान देशों के बीच बढ़ती नज़दीकी
भारत और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन आसियान के बीच आपसी महत्व के कई प्रमुख मुद्दों पर समझौते हुए हैं. भारत के लिए यह ‘पूर्व की तरफ़ निगाह’ डालने की दिशा में एक औऱ क़दम माना जा रहा है. भारतीय अधिकारियों ने बीबीसी को बताया है कि सम्मेलन में जिन समझौतों पर दस्तख़त हुए हैं वे सरकार की ऐसी नीति का मुख्य हिस्सा है. भारत ने यहाँ तीन समझौतों पर हस्ताक्षर किए – एक आपसी सहयोग के बारे में, एक आतंकवाद की रोकथाम के संबंध में और एक और समझौता किया है मुक्त व्यापार के बारे में. नज़दीकी दरअसल पिछले दो वर्षों में भारत आसियान के नज़दीक आ रहा है और लगातार दूसरे वर्ष भारत ने संगठन की वार्षिक बैठक में हिस्सा लिया है. भारत के अलावा चीन, जापान और दक्षिण कोरिया को ही ऐसा विशेष दर्जा मिला हुआ है. इसमें ज़रा भी संदेह नहीं कि दोनों पक्षों के बीच इन समझौतों के पीछे क्षेत्र में चीन के प्रभाव को लेकर पैदा हुई चिंता है मगर औपचारिक तौर पर कोई भी इसे नहीं मानेगा. मगर जिस गति से बस 10 महीने में ही ये समझौते हुए हैं उससे आसियान देश भी चकित हैं. इसके पहले आसियान देश भारत की क्षमता से तो इनकार नहीं करते थे मगर मुक्त व्यापार के संबंध में उनमें एक तरह की अनिच्छा रही थी. मगर पिछले एक साल में उनकी सोच काफ़ी बदली है और आसियान देश अब भारत के साथ अपने रिश्ते मज़बूत करना चाहते हैं. आसियान की नज़र मगर बीजिंग पर भी होगी और इसमें ज़रा भी संदेह नहीं है कि आसियान के सामने अगर भारत और चीन के बीच से किसी एक से संबंध का चुनाव करना होगा तो चीन उनके लिए पहली पसंद होगा. |
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