अफ्स़पा पर उमर-एंटनी आमने-सामने

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भारत प्रशासित राज्य जम्मू कश्मीर के कुछ हिस्सों से सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून (अफ्स़पा) क़ानून हटाए जाने की मांग के विवाद के बीच रक्षामंत्री एके एंटनी ने साफ़ कर दिया है कि इस मसले पर अंतिम फ़ैसला राज्य का एकीकृत कमांड मुख्यालय ही करेगा.
एंटनी ने कहा कि सीसीएस ने पिछले साल ही राज्य के कुछ हिस्सों से आशिंक तौर पर अफ्स़पा क़ानून को हटाए जाने के संदर्भ में अंतिम फैसला लेने का अधिकार एकीकृत कमांड मुख्यालय पर छोड़ दिया था.
रक्षामंत्री ए के एंटनी जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बयान पर प्रतिक्रिया दे रहे थे.
अब्दुल्ला ने कहा था कि बतौर मुख्यमंत्री राज्य के कुछ इलाकों से अफ्स़पा क़ानून हटाने का फैसला लेने का अधिकार उनके पास है.
उमर अब्दुल्लाह राज्य के उन हिस्सों से आंशिक तौर पर सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून हटाने की बात करते रहे हैं जहां 'आतंकवाद' पर काबू पा लिया गया है और सेना काम नहीं कर रही है.
रक्षामंत्री ए के एंटनी ने ज़ोर देते हुए कहा कि ये एक संवेदनशील मुद्दा है और सरकार को इसके बारे में उनकी राय बता दी गई है, उन्होंने ये भी कहा कि वो नहीं चाहते कि इस मुद्दे पर सार्वजनिक बहस हो.
सेना के समर्थन में एंटनी
बुधवार को जम्मू में हुए एकीकृत कमांड की बैठक में जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री ने कहा था कि राज्य से अफ्स़पा क़ानून को आंशिक तौर पर हटाना ही होगा.
तीन घंटे चली इस बैठक में सेना ने अपने एक कार्यक्रम के ज़रिए राज्य में अफ्स़पा क़ानून के महत्व को समझाने की कोशिश की.
इस कार्यक्रम में ये बताया गया कि राज्य में सक्रिय चरमपंथी ताकतों से निपटने के लिए अफ्स़पा क़ानून कितना ज़रुरी है और आंशिक तौर पर भी हटाए जाने पर ये राज्य की सुरक्षा तंत्र के लिए काफ़ी हानिकारक होगा.
रक्षा मंत्रालय ने भी इस मसले पर सेना का समर्थन किया है और कहा है कि उसे भी ऐसा लगता है कि इस क़ानून को हटाये जाने से चरमपंथियों के विद्रोह के खिलाफ़ की जानेवाली कार्रवाई के दौरान सेना कमज़ोर पड़ सकती है.
हाल में ही सेना के उत्तरी कमांड के कमांडर ले.जनरल केटी पटनायक ने कहा था कि सेना को अपना काम करने के लिए कुछ प्रावधानों की ज़रुरत है और ऐसे में अगर राज्य के कुछ हिस्सों से अफ्स़पा क़ानून हटाया जाता है तो सेना सही तरीके से काम नहीं कर पाएगी.
राज्य में सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून हटाने के मुद्दे पर पिछले महीने तब से बहस शुरु हुई जब मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ये घोषणा कर दी थी कि अगले कुछ दिनों में प्रदेश के कुछ हिस्सों से ये क़ानून हटा लिया जाएगा.












