तख़्तापलट, आपात समिति
19 अगस्त को केजीबी प्रमुख समेत आठ कम्युनिस्ट अधिकारियों ने सोवियत नेता मिखाइल गोर्बोचेफ़ को सत्ता से बेदखल कर दिया और एक आपात समिति का गठन कर लिया. गोर्बोचेफ़ को हिरासत में ले लिया गया. जबकि मॉस्को की गलियों में टैंक प्रवेश कर गए. लोकतंत्र का समर्थन करने वाले लोगों ने बोरिस येल्तसिन के घर यानी मॉस्को के

सोवियत संघ का विघटन
आठ दिसंबर 1991 को रूस, यूक्रेन और बेलारूस के नेताओं ने मुलाक़ात की और एक संधि पर हस्ताक्षर किए जिसके तहत कॉमनवेल्थ ऑफ़ इंडिपेंडेंट स्टेट्स (सीआईएस) का गठन किया गया. रूस ने ख़ुद को सोवियत संघ का उत्तराधिकारी घोषित किया. 25 दिसंबर को मिखाइल गोर्बोचेफ़ ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया. इसके अलगे दिन संसद ने सोवियत संघ का अस्तित्व ख़त्म होने की घोषणा कर दी.

रूसी संसद को भंग कर दिया गया
1993 में रूस के तत्कालीन राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन और सोवियत युग के समय में चुनी संसद के बीच संवैधानिक संकट उत्पन्न हो गया. येल्तसिन ने रूसी संसद को भंग करने का आदेश दे दिया. तीन अक्तूबर को कई सांसदों और उनके समर्थन में उतरे हथियारबंद जनसेना ने मॉस्को में कई सरकारी इमारतों पर धावा बोल दिया और एक टीवी केंद्र पर कब्ज़ा करने की कोशिश की. अगले दिन संसद पर टैंक से गोले बरसाए गए. कई लोग इस दौरान मारे गए. इस संघर्ष में येल्तसिन की जीत हुई जिसके बाद रूस ने नए संविधान के लिए मतदान किया.

चेचन्या युद्ध की शुरुआत
11 दिसंबर 1994 में बोरिस येल्तसिन ने रूसी सेना को चेचन्या में प्रवेश करने का आदेश दिया ताकि इस इलाक़े में क़ानून व्यवस्था क़ायम रखी जा सके. इस स्वायत्त गणराज्य में दो साल तक ख़ूनखराबा जारी रहा जिसमें हज़ारों लोग मारे गए.

बुदयोनफ़स्क में अपहरण संकट
14 जून, 1995 में शैमिल बासायेव के नेतृत्व में चेचन चरमपंथियों के एक गुट ने दक्षिणी रूस के बुदयोनफ़स्क में करीब 1600 लोगों को बंदी बना लिया और एक स्थानीय प्रसूति केंद्र में क़ैद कर लिया. इन चरमपंथियों की माँग थी कि रूस चेचन्या में सैन्य कार्रवाई बंद करे और चेचन नेता दुदायेव से बात करे. रूस इन माँगों को मानने के लिए तैयार हो गया. उसने बंदियों को छोड़े जाने के बदले बासायेव और उसके साथियों को चेचन्या वापस जाने की अनुमति दे दी.

रूस में ऋण संकट
अगस्त, 1998 में रूस ने घोषणा की कि वो अपना ऋण नहीं चुका सकता और प्रतिभूतियों का भुगतान नहीं कर सकता. इसके बाद रूसी मुद्रा की विनिमय दर कम हो गई. एक महीने में रूसी रूबल की क़ीमत 70 फ़ीसदी कम हो गई.

चेचन्या में दूसरा युद्ध
अगस्त, 1999 में बासायेव के चरमपंथियों ने दागीस्तान में हमला किया और मॉस्को में कई अपार्टमेंट में विस्फोट किए, इसके बाद रूस ने फिर से चेचन्या में अपने सैनिक भेजने का फ़ैसला किया. 30 सितंबर, 1999 को चेचन्या में दूसरा युद्ध शुरु हो गया. असल लड़ाई करीब 12 महीने तक चली लेकिन ‘आतंकवाद विरोधी अभियान’ करीब 10 साल तक कारगर रहा. इस युद्ध में 40 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए.

येल्तसिन का इस्तीफ़ा, पुतिन आए
31 दिसंबर 1999 को बोरिस येल्तसिन ने देश को संबोधित किया और कहा कि वे समय से पहले ही रूसी राष्ट्रपति के पद से इस्तीफ़ा दे रहे हैं. येल्तसिन ने रूसी लोगों से माफ़ी माँगी और व्लादिमीर पुतिन को कार्यवाहक राष्ट्रपति बना दिया. तीन महीने बाद पुतिन को राष्ट्रपति चुनाव में ज़बरदस्त जीत मिली.

कुर्स्क पनडुब्बी डूबी
12 अगस्त, 2000 को कुर्स्क परमाणु पनडुब्बी एक टारपीडो हमले के बाद बारेन्स समुद्र में डूब गई. दल के सभी 118 सदस्य मारे गए.

मॉस्को थिएटर में दर्शक बंधक
अक्तूबर. 2002 के अंत में एक हथियारबंद गुट ने मॉस्को में एक म्यूज़िकल देखने आए 916 दर्शकों को बंधक बना लिया. गुट की माँग थी कि चेचन्या से रूसी सेना हटाई जाए. रूस के विशेष दस्ते ने थिएटर में एक अज्ञात गैस छोड़ दी जिससे हथियारबंद गुट के सभी लोग मारे गए. लेकिन इसमें कम से कम 130 बंधकों की भी मौत हो गई.

जॉर्जिया में क्रांति
22 नवंबर, 2003 को जॉर्जिया में विपक्ष के नेता मिखाइल साकेशविली ने जैतून की एक शाखा लेकर संसद में प्रवेश किया. उस समय तत्कालीन राष्ट्रपति एडुएर्ड शेवर्दनात्ज़े भाषण दे रहे थे. विपक्ष के नेता के इस तरह आने से राष्ट्रपति भाषण छोड़कर चले गए. कुछ घंटे बाद ही शेवर्दनात्ज़े ने इस्तीफ़ा दे दिया. हज़ारों लोगों ने राजधानी तिब्लिसी की सड़कों पर निकलकर पटाखे फोड़े, जश्न मनाया और रॉक कन्सर्ट किए.

बाल्टिक देश यूरोपीय संघ में शामिल हुए
पहली मई, 2004 को लातविया, लिथुआनिया और एस्टोनिया यूरोपीय संघ का हिस्सा बन गए. ये देश सोवियत संघ छोड़ने वाले पहले देशों में से थे. पूर्व सोवियत संघ के बाकी देश यूरोपीय संघ का हिस्सा नहीं बन पाए. हालांकि यूक्रेन, मालदोवा और जॉर्जिया कहते रहे हैं कि वो सदस्य बनना चाहते हैं.

बेसलान स्कूल में बंधक
रूस में एक सितंबर, 2004 का दिन स्कूली सत्र का पहला दिन था. कुछ चरमपंथियों ने उत्तरी ओसेतिया के बेसलान में स्कूल में मौजूद लोगों और बच्चों को बंधक बना लिया. तीन दिन तक उन्होंने 1100 लोगों को बंधक बनाए रखा जिसमें ज़्यादातर छह से 18 साल की उम्र के बच्चे थे. तीसरे दिन स्कूल में ज़बरदस्त धमाका हुआ जिसके बाद रूसी सुरक्षा बलों ने स्कूल पर धावा बोल दिया. इस संघर्ष में 335 लोग मारे गए जिसमें 186 बच्चे थे. धमाका किस कारण हुआ था इस पर आज भी बहस जारी है.

यूक्रेन में ऑरेंज क्रांति
22, नवंबर को यूक्रेन में राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर के मतदान के बाद दूसरी रात थी. पराजित उम्मीदवार विक्टर युशचेंको के समर्थक राजधानी कीव में इकट्ठा होने लगे. इनकी माँग थी कि राष्ट्रपति चुनाव के आधिकारिक नतीजे रद्द किए जाएँ. नतीजों में विक्टर यानुकोविच को विजयी घोषित किया गया था. छह हफ़्तों तक लोगों का प्रदर्शन जारी रहा. नतीजतन दोबारा मतदान हुआ और युशचेंको की जीत हुई. युशचेंको के समर्थकों के झंडे का रंग ऑरेंज यानी नारंगी था, सो इसे ऑरेंज क्रांति कहा जाता है. ये लोग पुतिन के ख़िलाफ़ थे.

नाशी आंदोलन
रूस में 2005 के बाद से क्रेमलिन के प्रति समर्थन बढ़ाने के लिए युवा आंदोलन समितियाँ बनाई जाने लगीं. क्रेमलिन की ओर से प्रायोजित गुट नाशी ने ख़ुद को फ़ासीवाद विरोधी गुट के तौर पर पेश किया और कहा कि राजनीतिक विरोधियों को मॉस्को की सड़कों पर जगह नहीं मिलेगी.

सोची बना शीतकालीन ओलंपिक का मेज़बान
रूस के शहर सोची ने वर्ष 2014 के शीतकालीन ओलंपिक खेलों की मेज़बानी जीती. मतदान से पहले रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने वादा किया कि ब्लैक सी रिसॉर्ट में वे खेलों के लिए बर्फ़ का इंतज़ाम करेंगे. रूस पहली बार शातीकालीन ओलंपिक की मेज़बानी करेगा. बाद में रूस को 2018 फ़ुटबॉल विश्व कप, ऐथलेटिक्स विश्व चैंपियनशिप, फ़ॉर्मूला वन समेत कई प्रतियोगिताओं की मेज़बानी भी मिली.

ऐना पोलितकोफ़्सकाया की हत्या
सात अक्तूबर 2006 को रूसी पत्रकार ऐना पोलितकोफ़्सकाया की मॉस्को में हत्या कर दी गई. वे अपने घर की इमारत में लिफ़्ट में जा रही थीं. वे कई सालों से चेचन्या युद्ध पर रिपोर्टिंग कर रही थीं. उन्होंने कई बार रूसी अधिकारियों और चेचन अधिकारियों की आलोचना की थी. ऐना पोलितकोफ़्सकाया ने चेचन्या में मारे गए सैनिकों की माताओं के न्यायिक अधिकारों के पक्ष में आवाज़ उठाई थी. सेना में भ्रष्टाचार के आरोपों की छानबीन की थी.

एलेक्ज़ेंडर लित्विनेन्को की मौत
रूसी खुफिया एजेंसी के पूर्व जासूस एलेक्ज़ेंडर लित्विनेन्को दो पूर्व सहयोगियों से मिलने के बाद बीमार पड़ गए. उन्होंने ब्रिटेन में शरण ली हुई थी. तीन हफ़्ते बाद लित्विनेन्को की लंदन के एक अस्पताल में मौत हो गई. उनकी मौत रेडियोधर्मी पोलोनियम-210 से फैले ज़हर के कारण हुई. लित्विनेन्को को रूस के राष्ट्रपति पुतिन का कड़ा आलोचक माना जाता था. इस हत्या के लिए रूसी नागरिक आंद्रे लुगोवोई को दोषी ठहराया गया. लेकिन रूस ने उन्हें ब्रिटेन प्रत्यर्पित करने से मना कर दिया था. जिसके बाद दोनों देशों में काफ़ी तनाव रहा.

राष्ट्रपति मेदवेदेव का संघर्ष
अगस्त, 2008 में दक्षिण ओसेतिया में युद्ध छिड़ गया. दक्षिण ओसेतिया पर पिछले कई वर्षों से जॉर्जिया का नियंत्रण नहीं था जबकि यहाँ के पृथकतावादियों को रूस का समर्थन प्राप्त था. रूस ने कार्रवाई करते हुए दक्षिण ओसेतिया और अबख़ाज़िया को अपने नियंत्रण में ले लिया जिस वजह से जॉर्जिया के कुछ इलाक़ों पर रूस का कब्ज़ा हो गया. फ़्रांसीसी राष्ट्रपति निकोला सारकोज़ी के बीच-बचाव के बाद सैन्य कार्रवाई थमी. बाद में रूस ने दक्षिणी ओसेतिया और अबख़ाज़िया को स्वतंत्र देश की मान्यता दे दी.

गैस को लेकर छिड़ी जंग
एक जनवरी 2009 को रूस ने यूक्रेन को गैस सप्लाई बंद कर दी. गैस की की़मत को लेकर दोनों देशों में मतभेद था. इस वजह से यूरोप को जाने वाली गैस सप्लाई कम होने लगी. रूस पश्चिमी, मध्य और दक्षिण पूर्वी यूरोपीय देशों को गैस आपूर्ति करता है जो यूक्रेन से होकर जाने वाली पाइप लाइन के ज़रिए ही जाती है. सात जनवरी को यूक्रेन के ज़रिए गैस सप्लाई बंद कर दी गई. 20 जनवरी को जाकर रूस और यूक्रेन में समझौता हो गया. लेकिन इस विवाद की वजह से यूरोप में इस बात पर बहस छिड़ गई कि गैस सप्लाई के स्रोत के तौर पर रूस कितना भरोसेमंद है.

मॉस्को में मेट्रो और हवाईअड्डे पर हमला
24 जनवरी, 2011 को मॉस्को के डोमोडेडोवो हवाईअड्डे पर धमाका हुआ जिसमें 37 लोग मारे गए. चेचन के अलगाववादी नेता उमारोफ़ का कहना है कि उन्होंने विस्फोट का आदेश दिया था. इसके नौ महीने पहले मॉस्को के मेट्रो स्टेशनों पर धमाके हुए थे जिसमें 49 लोग मारे गए थे.























