यौन शोषण मुद्दे पर पोप के ख़िलाफ़ लगे सीधे आरोप

रोमन कैथोलिक चर्च में पादरियों द्वारा यौन शोषण के मुद्दे पर रोमन कैथोलिक ईसाइयों के धर्मगुरू पोप बेनेडिक्ट 16वें के ख़िलाफ़ पहली बार सीधे आरोप लगे हैं.
उन पर आरोप है कि 1985 में वैटिकन के वरिष्ठ अधिकारी के तौर पर उन्होंने एक ऐसे पादरी के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने में देरी की जिसके ख़िलाफ़ बाल यौन शोषण का आरोप था.
ये आरोप 1985 में लिखे उस पत्र के आधार पर लगाए गए हैं जिसमें तब कार्डिनल रहे जोसेफ़ राटज़िंगर (जो बाद में पोप बेनेडिक्ट 16वें बने) ने अमरीकी पादरी स्टीफ़न काइसली को बर्ख़ास्त करने की अपीलों पर तत्काल कार्रवाई नहीं की थी.
इस अमरीकी पादरी पर बच्चों के यौन शोषण का आरोप था.
उधर वैटिकन का कहना है कि वह पादरी के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के बारे में उचित सावधानी बरत रहे थे और ये पत्र एक लंबे पत्राचार का हिस्सा है और इसे प्रसंग से बाहर जाकर नहीं देखना चाहिए.
उस पत्र में दुनिया भर में चर्च के भले की बात कही गई है और ये भी कहा गया है कि उस मामले में फ़ैसला लेते वक़्त उसे ध्यान में रखा जाए.
पोप बेनेडिक्ट 16वें के ख़िलाफ़ आरोप तब लगे हैं जब वैटिकन ने कहा है कि पोप पादरियों द्वारा यौनशोषण के पीड़ितों को मिलने के लिए तैयार हैं.
वैटिकन का ये भी कहना है कि चर्च इंटरनेट पर एक निर्देशिका छापेगा.
इसका मक़सद ये स्पष्ट करना होगा कि बिशप किस तरह से यौन शोषण के आरोपों के बारे में कार्रवाई करते हैं और इन मामलों का निपटारा करते हैं.
बीबीसी के धार्मिक मामलों के संवाददाता रॉबर्ट पिगॉट का कहना है कि वैटिकन पर पिछले कुछ हफ़्तों में दबाव बढ़ गया है.
उनके अनुसार चर्च ने पादरियों के ख़िलाफ़ लगे यौन शोषण के आरोपों पर जिस तरह कार्रवाई की है उसकी कड़ी आलोचना हुई है.












