यमन में बाल विवाह विरोधियों की रैली

यमन में सैकड़ों महिलाओं ने देश के संसद के बाहर बाल विवाह पर रोक लगाने वाले का़नून के समर्थन में रैली की है.
यमन में एक ऐसा क़ानून प्रस्तावित है जिसके तहत शादी की कम से कम उम्र लड़कियों के लिए 17 साल और लड़कों के लिए 18 साल हो जाएगी.
हालाँकि कुछ रुढ़िवादी मुसलमान इस प्रस्तावित क़ानून का विरोध कर रहे हैं.
बुधवार की रैली उस प्रदर्शन के बाद की गई है जिसमें हज़ारों महिलाओं ने प्रस्तावित क़ानून के विरोध में रैली की थी.
सरकार नए क़ानून का प्रस्ताव एक आठ वर्षीय लड़की और 30 साल के पुरुष के बीच हुई शादी के रद्द हो जाने के बाद लाई है.
बुधवार की रैली में नौ साल की नुजूद मोहम्मद अली भी थी, जिसकी शादी को रद्द किया गया है.
लेकिन कुछ सांसद सदस्यों ने प्रस्तावित क़ानून में परिवर्तन की अपील की है.
परिवर्तन न हो
समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार नुजूद मोहम्मद अली का कहना है कि वो इसलिए विरोध प्रदर्शन में शामिल हो रही हैं ताकि प्रस्तावित क़ानून में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया जाए.
सोमवार को मौलवियों के एक समूह ने प्रस्तावित क़ानून के विरोध में एक फ़तवा भी जारी किया और कहा है कि जो इस क़ानून का समर्थन कर रहे हैं दरअसव वो धर्मत्यागी हैं.
संसद के सभापति याहया अल रैई का कहना है कि शादी की उम्र की सीमा को बनाए रखने के लिए प्रस्तावित क़ानून में बदलाव किया जा सकता है, लेकिन इस क़ानून के तोड़े वालों को जुर्माने और जेल की सज़ा को हटा दिया जाएगा.
माना जा रहा है कि समिति इस संबध में आख़िरी फ़ैसला अप्रैल में करेगी.
नए क़ानून के पक्षधरों का कहना है कि कम उम्र में शादी की वजह से मातृ मृत्यु दर काफ़ी अधिक है और कम उम्र में शादियों की वजह से उनमें शिक्षा की भी कमी है क्योंकि शादी के कारण लड़कियों की पढ़ाई बाधित होती है.
यमन अरब दुनिया का सबसे ग़रीब देश है और एक चौथाई लड़िकयों की शादी 15 साल के उम्र से पहले हो जाती है.












